इंस्पेक्टर शर्मा को याद कर पूर्व आईपीएस करनैल सिंह का भर गया गला
बाटला हाउस एनकाउंटर में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा शहीद हो गए थे। उस वक्त दिल्ली क्राइम ब्रांच के चीफ पूर्व आईपीएस करनैल सिंह ने कहा कि इस एनकाउंटर को झूठा बताने वालों की होड़ लग गई थी। जबकि, न्यायिक प्रक्रिया में सभी आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है। इंस्पेक्टर शर्मा के योगदान को याद करते हुए उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर से एक दिन पहले शर्मा का बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था। लेकिन, वह उसके साथ रहने के बजाय वह टीम के साथ गए।
पुलिस की मेहनत से तराई में हुआ था आतंक का सफाया
तराई के आतंकवाद विषय पर पूर्व डीजीपी आलोक लाल, पूर्व डीजीपी उत्तराखंड अनिल रतूड़ी और डीजीपी अशोक कुमार ने चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि पंजाब में जब आतंकवाद की जड़ें उखड़ने लगी तो आतंकियों ने तराई का रुख किया। उस वक्त उत्तर प्रदेश की पुलिस के पास ऐसा कोई अनुभव नहीं था कि अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों पर कैसे काबू पाया जाए। बावजूद इसके तराई के इस आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया। पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने अपने कार्यकाल की प्रमुख घटनाओं का जिक्र किया। 1990 से 1993 के बीच आतंकियों ने तराई (उत्तराखंड के रुद्रपुर से बरेली तक इलाका) में सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारा था।
ये भी पढ़ें...Badrinath Dham: भगवान बदरीविशाल के दर्शन के लिए पहुंचीं डिंपल यादव, पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद
ट्रिपल पॉवर के सदुपयोग से जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी पुलिस : डीजीपी
अंतिम सत्र में डीजीपी अशोक कुमार की पुस्तक खाकी में इंसान पर चर्चा हुई। इसमें डीजीपी अशोक कुमार, एसएसपी देहरादून अजय सिंह और पुस्तक के सह लेखक लोकेश ओहरी ने चर्चा की। इस दौरान डीजीपी ने कहा कि पुलिस को ट्रिपल पॉवर मिली है। यानी उसके पास वर्दी, हथियार और कानून हैं। इसी ट्रिपल पॉवर का इस्तेमाल करते हुए पुलिस जनता की उम्मीदों पर खरा उतर सकती है। एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि किताब से रोजमर्रा की पुलिसिंग में सहायता मिलती है, साथ ही सिस्टम को सुधारने के लिए किसी एक को आगे रहकर नेतृत्व करना होता है।