हरिद्वार में अंजुमन सीरतुन्नबी की बैठक में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बारावफात जैसे दिन डीजे बजाने के खिलाफ फतवा जारी किया।
सभी त्योहार सादगी से मनाने की हिदायत
मुस्लिम समाज को अपने सभी त्योहार सादगी से मनाने की हिदायत देते हुए मौलानाओं ने साफ-साफ कहा कि मुसलमानों को कुरान का आदेश मानते हुए ढोंग से बचना चाहिए।
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ज्वालापुर मदरसा अरसदिया चौहानान में हुई बैठक में सिरतुन्नबी के अध्यक्ष मौलाना शराफत ने कहा कि इस्लाम के अनुसार मोहर्रम का महीना साल का पहला होता है। नबी हजरत मोहम्मद साहब ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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मुस्लिम समाज के कुछ लोग इस दिन को जश्न-ए-ईद कहकर मनाते हैं। देवबंदी और बरेलवी उलेमा ने इसका विरोध किया है। कुछ शहरों में लोगों को फुसला कहकर पैसा इकट्ठा किया जाता है और डीजे बजाकर नाच-गाना किया जाता है।
कानून का सम्मान करना सीखना होगा
ऐसा कदापि नहीं होना चाहिए। मौलवी रफीक और मौलाना अफ्तार ने कहा कि मुसलमानों को अपने त्योहार सादगी के साथ मनाने चाहिए। सज्जाद एडवोकेट ने कहा कि धर्म के साथ-साथ देश के कानून का सम्मान करना सीखना होगा।
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तालीम और तरक्की के मैदान में भी आगे आना होगा। भारत को विश्व का सबसे ताकतवर देश बनाने के लिए मुसलमानों को काम करना है।
बैठक में कारी इदरीश, मौलाना दिलशाद, अरशद राणा, कदीर कुरैशी, मौलाना अब्बास शेख, मुफलिस गौड़, सरफराज गौड़, डॉ शमशाद, मौलाना मोहम्मद अहमद, मौलाना इकबाल, मौलाना साजिद, सनव्वर कुरैशी आदि मौजूद थे।
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डीजे बजाने पर प्रतिबंध का आदेश विधिवत जारी किया गया। इसे अंजुमन ने फतवा नाम दिया है।