इंडियन काउंसिल फॉर फारेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आईसीएफआरई) से जुड़े संस्थानों में डेपुटेशन के अलावा एडिशनल चार्ज का भी खेल चल रहा है।
नियमानुसार एडिशनल चार्ज पर कोई पैसा नहीं दिया जाता, लेकिन पूर्व डीडीजी (रिसर्च) डा. जीएस रावत ने यहां भी नियम अपने हिसाब से बदल डाले। उन्होंने अतिरिक्त पदभार के लिए 1,63,217रुपये वसूल लिए।
रावत को बचाने की कवायद
विजिलेंस आफिसर की संस्तुति पर बोर्ड आफ गवर्नेंस (बीओजी) ने रिकवरी का निर्णय किया, लेकिन अफसरों ने नोटिस रावत तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया। अब बीओजी खुद ही रावत को बचाने की कवायद में जुट गई है।
मामला वर्ष 2009 का है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से निदेशक एके लाल के आदेश पर आईएफएस जीएस रावत को 20 अगस्त 2009 से डीजी का अतिरिक्त चार्ज दिया गया। आदेश में स्पष्ट था कि नियमानुसार इस जिम्मेदारी के लिए उन्हें अलग से कोई वेतन नहीं दिया जाएगा।
दो साल बाद आईसीएफआरई के सचिव सुधांशु गुप्ता ने एक आदेश जारी कर डा. रावत को वर्ष 2010-11 में डीजी पद के अतिरिक्त भार के लिए 1,63,217 रुपये दे दिए। इसके लिए गुप्ता ने ‘एफआर 49’ नियम का हवाला दिया, जबकि इस नियम में ऐसी पेमेंट का कोई प्रावधान नहीं है।
18 नवंबर 2011 को आईसीएफआरई के चीफ विजिलेंस आफिसर संदीप त्रिपाठी ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सचिव को भेजे पत्र में बताया कि इस तरह रकम निकालना नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने मामले में डा. रावत के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने तक की संस्तुति की। इसके बाद बीओजी ने डा. रावत को रिकवरी के लिए नोटिस तैयार किया, लेकिन भेजा नहीं। अफसर टालमटोल करते रहे।
अब 20 फरवरी 2014 को हुई बीओजी की 49वीं मीटिंग में तय किया गया है कि रिकवरी के बजाय डा. रावत के मामले पर पुनर्विचार किया जाए। साफ है कि घपले की पुष्टि के बावजूद आईएफएस अधिकारी को बचाने की पूरी कवायद चल रही है।
खास बात यह है कि मीटिंग में वन पर्यावरण मंत्रालय के सचिव और बीओजी के अध्यक्ष डा. वी राजगोपालन, डीजी डा. एसएस गर्ब्याल, एडिशनल सेक्रेटरी मंत्रालय सुधांशु मोहंती, एफएसआई के डीजी डा. अनमोल कुमार, डा. बी मोहन कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे। ऐसे में केंद्रीय मंत्रालय की मंशा भी सवालों के घेरे में है। डा. रावत अब रिटायर हो चुके हैं।
1100 को 35 लाख से बढ़ता है बोझ
यहां अहम सवाल यह भी है कि आईसीएफआरई से जुड़े संस्थानों में आज तक टेक्निकल एवं सपोर्टिंग स्टाफ के 1100 कर्मियों को चौथे वेतन आयोग का लाभ ही मिल रहा है। इन्हें छठे वेतन आयोग का लाभ देने के लिए 35 लाख रुपये की दरकार है। सूत्र बताते हैं कि संस्थान में कई अधिकारी एडिशनल चार्ज पर हैं और इसके लिए लाखों रुपये ले रहे हैं, लेकिन जरूरतमंद कर्मचारियों की सुध नहीं ली जा रही।