इस मामले में राजपुर पुलिस ने चैनल के इंवेस्टीगेटिंग एडीटर आयुष गौड़ की शिकायत पर पिछले साल 10 अगस्त को सीईओ उमेश शर्मा, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुल सचिव मृत्युंजय मिश्रा, शर्मा के सहयोगी राहुल भाटिया, प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मुकदमा दर्ज किया था। गुप्त रणनीति के तहत पुलिस ने 22 अक्टूबर 2018 को अदालत से गिरफ्तारी और तलाशी वारंट हासिल कर 28 अक्टूबर को गाजियाबाद स्थित शर्मा के आवास पर छापा मारा।
पुलिस ने उमेश शर्मा को गिरफ्तार कर घर से काफी संख्या में सीडी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य दस्तावेज बरामद किए थे। अगले दिन पुलिस ने उमेश को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
झारखंड में उमेश शर्मा के खिलाफ देशद्रोह की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। इसी बीच 19 नवंबर को सत्र न्यायालय ने उमेश शर्मा की जमानत मंजूर कर दी। इसी दिन रात में बी वारंट के आधार पर पुलिस आरोपी उमेश को रांची ले गई।
स्टिंग प्रकरण की विवेचना में पुलिस ने मुख्यमंत्री के भाई वीरेन्द्र सिंह रावत समेत 18 को गवाह बनाया है। रावत के अलावा सीएम के करीबी संजय गुप्ता, वादी आयुष गौड़, सीएम के सुरक्षा अधिकारी संजय विश्नोई, सीबीसीआईडी के निरीक्षक बहादुर सिंह चौहान, सीओ विकास नगर भूपेन्द्र सिंह धोनी और तीन बैंक प्रबंधक प्रमुख रूप से शामिल है।
सीधे मुख्यमंत्री से जुड़े मामले में वरिष्ठ पुलिस और अभियोजन अधिकारियों ने जिस तरह से कमजोर मुकदमा दर्ज कराया। उसने सरकार की खूब किरकिरी कराई। गोपनीय रखने के चक्कर में मामले में इतनी तकनीकी खामियां छोड़ दी गईं, जिससे आरोपियों को लाभ मिला और विवेचना में पुलिस को कदम खींचने पड़े।
इसी का नतीजा है कि जिन धाराओं के तहत पहले मामला दर्ज हुई वह धाराएं हटाना विवेचक की मजबूरी बन गई। अब चूंकि मामला सीधे सरकार के मुखिया से जुड़ा था, लिहाजा मामले को कोर्ट तक पहुंचा दिया गया। विधि विशेषज्ञ कहते हैं कि सामान्य व्यक्ति से जुड़ा प्रकरण होता तो इसमें अंतिम रिपोर्ट लगना तय था।
कार्रवाई में शामिल रहे 32 पुलिसकर्मी
स्टिंग प्रकरण में विवेचना से लेकर आरोप पत्र दाखिल करने में हुई पूरी कार्रवाई में 32 पुलिसकर्मियाें को शामिल किया है। पहले इस प्रकरण की विवेचना थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने की थी। बाद में यह विवेचना एसओ नत्थीलाल उनियाल को सौंपी गई। इसके अलावा वीडियो रिकार्डिंग और माल दाखिल करने वाले पुलिसकर्मियाें का उल्लेख भी किया गया।
10 अगस्त - स्टिंग प्रकरण में राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज
22 अक्टूबर - राजपुर पुलिस ने कोर्ट से सर्च और गिरफ्तारी वारंट हासिल किया
28 अक्टूबर - गाजियाबाद स्थित आवास से उमेश शर्मा की गिरफ्तारी
29 अक्टूबर - उमेश शर्मा को आठ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा
31 अक्टूबर - उमेश शर्मा की सात घंटे की रिमांड मंजूर
01 नवंबर - पुलिस ने उमेश को रिमांड पर लेकर पूछताछ और मसूरी रोड स्थित घर में तलाशी की
01 नवंबर - उमेश शर्मा के खिलाफ राजपुर थाने में एक और मुकदमा दर्ज
02 नवंबर - उमेश शर्मा को कस्टडी रिमांड पर लेने की पुलिस की अर्जी खारिज
02 नवंबर - उमेश शर्मा की जमानत निचली अदालत से खारिज
04 नवंबर - झारखंड की राजधानी रांची में उमेश के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा
08 नवंबर - सेशन कोर्ट में उमेश की जमानत याचिका दाखिल
16 नवंबर - सेशन कोर्ट ने उमेश की जमानत याचिका मंजूर की
10 अप्रैल- पुलिस ने उमेश शर्मा समेत दो के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल
मुख्यमंत्रियों के करीबियों की 20 सीडी सौंपकर मैंने कोर्ट से पूरे मामले की सीबीआई जांच और प्राथमिकी रद्द करने की मांग की है। 26 मार्च को इस मामले में सुनवाई नहीं हो पाई। 23 अप्रैल को हाईकोर्ट में इस प्रकरण की सुनवाई है। कोर्ट से मुझे राहत न मिले इसलिए आनन-फानन में कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। मुझे कोर्ट से न्याय की पूरी उम्मीद है, मैं इस लड़ाई को अंतिम सिरे तक लडूंगा। राजद्रोह के मामले में झारखंड में दर्ज मुकदमे का भी यही हश्र होना तय है।
-उमेश शर्मा, आरोपी चैनल संचालक
स्टिंग प्रकरण की विवेचना में आए साक्ष्याें के आधार पर उमेश शर्मा और राहुल भाटिया के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया है। पूर्व कुल सचिव मृत्युंजय मिश्रा और शिवम भाटिया के खिलाफ विवेचना प्रचलित है। विवेचना में साक्ष्य न मिलने पर प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी के नाम निकाल दिए हैं।
-निवेदिता कुकरेती, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक