लूटी गई रकम दिल्ली में एक पूर्व मुख्यमंत्री के आवास से चली थी। साथ ही दावा किया था उनके पास इसके पुख्ता साक्ष्य हैं और जल्द ही वह साक्ष्यों के सामने आकर इसका खुलासा करेंगे।
मीडिया हाउस से बातचीत में अनुपम शर्मा 13 अप्रैल तक यहीं दावा करते रहे, लेकिन 14 अप्रैल को अचानक उनके सुर बदल गए। 15 अप्रैल को अनुपम शर्मा एसटीएफ के सामने आए तो नई कहानी सुना दी। पूछताछ में शर्मा बैग में किसी तरह की रकम होने से मुकर गए।
एक कदम आगे बढ़ाकर बैग को ही अनुरोध पंवार का बता दिया। यह भी खुलासा किया कि बैग में शराब की दो बोतल, कपड़े और ड्राईफ्रूट के अलावा कुछ नहीं था। एसटीएफ ने चारों आरोपियों को लूट की धारा में जेल तो भेज दिया, लेकिन लूट की रकम का जवाब नहीं दे पाई। बदलते घटनाक्रम में अब हर कोई अनुपम शर्मा के बदले बयानाें के पीछे का सच जानना चाहता है।
शर्मा के कौन से बयान को सच और कौन से बयान को झूठ माना जाए। इसके लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या हकीकत में लूट में गई धनराशि के तार पूर्व मुख्यमंत्री और पौड़ी लोकसभा सीट से जुड़े थे या फिर लूट में फंसे अनुपम शर्मा ने अपने बचाव में कोई चाल चली थी। एसटीएफ के सामने अनुपम का बदला बयान किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। ऐसे तमाम सवाल हैं, जिनके जवाब एसटीएफ को ढूंढने हैं।
11 अप्रैल को यह खबर प्रकाशित होने के बाद आरोपी कांग्रेसी नेता अनुपम शर्मा ने अमर उजाला से संपर्क कर अपना पक्ष रखा था। लूट प्रकरण में अनुपम शर्मा से हुई बातचीत का एक-एक शब्द आपके सामने प्रस्तुत है-
-यह जो मामला है आज जैसे छपा है, कोई प्रॉपर्टी डील का मामला था और इसमें लूट हुई है और मैं कोई प्रॉपर्टी डीलर हूं। पहले तो यह स्पष्ट करना चाहता हूं, मैं कोई प्रॉपर्टीडीलर नहीं हूं। पूरे जीवन में प्रॉपर्टी की कोई डीलिंग नहीं की है। नंबर वन और नंबर टू यह कि मामला राजनैतिक पैसे से जुड़ा हुआ है। इसके बारे में मेरे पास प्रमाण हैं बहुत सारे। यह मामला पौड़ी की सीट से जुड़ा हुआ मामला है। इसमें जो सारी चीजें हुई हैं, इसकी शुरूआत एक पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले से दिल्ली में हुई।
-कौन, नाम खोलेंगे के सवाल पर अनुपम ने जवाब दिया कि नाम खोलने से पहले मेरे पास बहुत सारे प्रमाण हैं। मैं उन प्रमाणों को लेने दिल्ली आया हूं। मै दिल्ली आया हूं और जब मैं सारे प्रमाण ले लूंगा, उसके बाद मैं आपसे खुलकर पूरे प्रमाण सहित बात करना चाहूंगा। मतलब जैसे अभी तक आप लोगों को पता है कि यह लूट का मामला है, मैंने पैसे लुटवा दिए और यह मामला दरअसल ये नहीं है। इसके मेरे पास पुख्ता प्रमाण हैं, जो कि मैं पुख्ता प्रमाण देकर बताऊंगा कि राजनैतिक मामला है। इनके पास कोई प्रमाण नहीं हाेंगे। प्रॉपर्टी का पैसा था। पुख्ता प्रमाण देकर बताऊंगा कि यह राजनैतिक मामला कल शाम तक सारी चीजें जहां से मुझे लेनी है, मैं ले लूंगा। ये वन साइडेड मामला नहीं है।
-इसी बीच फोन कट जाता है। अनुपम शर्मा वापस कॉल कर कहते हैं कि आप मेरा नाम कोट कर लिख सकते हैं कि यह पौड़ी से जुड़ा मामला है। ये मामला राजनैतिक है। मैं ना प्रॉपर्टी डीलर हूं और ना ही प्रॉपर्टी की कोई डील की है। इसकी शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री के दिल्ली आवास से हुई। यह मामला पौड़ी की सीट से जुड़ा है। इतना मेरी तरफ इतना लिख सकते हैं।
-अनुरोध पंवार से जुड़ाव के सवाल पर उन्हाेंने कहा कि अनुरोध पंवार से मुख्यमंत्री के बंगले पर तीन तारीख को जीवन में पहली बार मिला हूं और इन्हीं लोगों के इनके कहने पर मिला हूं। मेरे पास बहुत सारे प्रूफ हैं। मैं परसाें प्रूफ के साथ आपके पास आना चाहता हूं। बहुत सारी चीजें हैं जो इस बात को साबित करेंगी कि मैं ठीक ही बोल रहा हूं, ये गलत बोल रहे हैं। इसके बाद बवाल ही होना है और इसके बाद कुछ होना नहीं है। इतनी सारे चीजें होंगी तो उसका चुनाव प्रभावित होगा। सब कुछ हो जाएगा। प्रमाण के साथ आऊंगा।