पुलिस उमेश को लेकर सोमवार देर रात देहरादून पहुंची थी। पहले उसे राजपुर थाने में रखा गया और इसके बाद करीब साढ़े दस बजे पुलिस उसे न्यायालय लेकर पहुंची। यहां अधिवक्ता के शोक में सभी स्थानीय अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत थे।
लिहाजा उमेश ने अदालत में पहले खुद ही अपना पक्ष रखा। इसके बाद दिल्ली से आए अधिवक्ता ने बचाव के लिए अदालत में तर्क रखे। इसके साथ ही अभियोजन की अधिवक्ता ऋचा कोठियाल ने उमेश और उनके अधिवक्ता के तर्कों का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने उमेश को आठ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
इधर, पुलिस ने अदालत से उमेश की पांच दिन की कस्टडी रिमांड भी मांगी। इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर एसओ राजपुर अरविंद कुमार का कहना है कि इस मामले में अभी कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पुलिस को बरामद करनी हैं। इसके साथ ही पूर्व में जब वादी (आयुष गौड़) के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज कराए गए थे, उनमें गौड़ ने उमेश पर धमकी के आरोप लगाए थे।
आरोप था कि उमेश ने अपने लाइसेंसी असलाह के माध्यम से भी उसे जान से मारने की धमकी दी थी। ऐसे में उमेश से वह असलाह भी बरामद करना है। पुलिस के इस प्रार्थनापत्र पर मंगलवार को सुनवाई होगी। इसके साथ ही उमेश कुमार ने खुद को बेगुनाह बताते हुए जमानत की अर्जी भी दायर की, जिस पर मंगलवार को ही सुनवाई होनी है।
उमेश कुमार ने अदालत परिसर में पत्रकारों से कहा कि उसे सरकार ने फंसाया है। अब सरकार से उसे जान का खतरा है। सरकार कभी भी उसके साथ अनहोनी करा सकती है। इसका यह जीता जागता उदाहरण है, कि उसे गिरफ्तार करने और कोर्ट में पेश करने के लिए भी इतनी बड़ी फौज लाई जा रही है।