यदि सरकार सही काम कर रही है तो उसे किस बात का डर था। जो रातों-रात उनके खिलाफ लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश रची गई। एक के बाद एक फर्जी मुकदमे दर्ज कराए गए।
गोपनीय ढंग से 80 दिन पहले उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में कोर्ट को गुमराह कर उनके खिलाफ गिरफ्तारी और सर्च वारंट लिया गया। यही नहीं गिरफ्तारी के समय पुलिस उनके आवास में घुसकर काफी सामान उठाकर ले गई। इन सब के बावजूद चार माह में पुलिस और सरकार उनके खिलाफ एक भी सबूत नहीं जुटा सकी है।
सरकार के मुखिया ने रांची में उस व्यक्ति के माध्यम से मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके घर उनका आना-जाना था। उन्हाेंने कहा कि स्टिंग आपरेशन हुए हैं तो सामने भी आएंगे। उन्हाेंने उच्चतम न्यायालय को पहले ही दो स्टिंग होने की जानकारी दे दी है। उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है। गलत साबित होने पर वह हर सजा भुगतने को तैयार हैं।