देहरादून जिले में चकराता रोड पर अवैध निर्माण ढहाने में एमडीडीए वीसी के खिलाफ हुई शिकायत पर स्पष्टीकरण मांगना दो आईएएस अफसरों के बीच टकराव का कारण बन गया।
वीसी ने पहले स्पष्टीकरण मांगने के तरीके को लेकर कार्मिक विभाग के सचिव की फोन पर जमकर क्लास ली। इसके बाद मुख्य सचिव को डेढ़ पेज का पत्र लिखकर अपनी व्यथा बताई। बाद में मुख्य सचिव ने मध्यस्थता करवाकर विवाद निपटाया।
करीब दो वर्ष पूर्व एमडीडीए की ओर से चकराता रोड पर तमाम दुकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी।
मामले में एमडीडीए के उपाध्यक्ष मीनाक्षी सुंदरम पर तमाम आरोप लगाते हुए एक व्यक्ति ने शिकायत करते हुए जांच की मांग की। नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध शिकायत पर तभी जांच संभव है, जब शिकायत के साथ शिकायतकर्ता का हलफनामा भी हो।
ऐसा न होने पर मामला आया-गया हो गया। इसी मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री खजानदास ने राज्यपाल से शिकायत की। वहां से इस मामले पर वीसी से आख्या मांगी गई। कई दिन तक वीसी की ओर से कोई जवाब न देने के बाद कार्मिक विभाग को इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगने को कहा गया।
इस पर कार्मिक विभाग के सचिव डी. सेंथिल पांडियन के निर्देश पर उप सचिव महावीर सिंह ने वीसी सुंदरम को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांग लिया। बस इसी मुद्दे पर जमकर बवाल मच गया। वीसी मीनाक्षी सुंदरम को यह बात नागवार गुजरी, तो उन्होंने सचिव डी. सेंथिल पांडियन को फोन करके ऐसा करने के बारे में पूछा। सचिव ने कार्रवाई नियमानुसार होने की बात कही तो वह बिफर गए और सचिव की जमकर क्लास ले ली। इसके बाद मुख्य सचिव को भारी-भरकम चिट्ठी लिखकर वरिष्ठ अधिकारियों का परेशान किए जाने का आरोप लगाया। बाद में मुख्य सचिव ने दोनों अधिकारियों का आमना-सामना कराकर पूरे विवाद का पटाक्षेप कराया।
कार्मिक विभाग द्वारा स्पष्टीकरण मांगने के मुद्दे पर एमडीडीए वीसी ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने पत्र के माध्यम से मुझे इस पूरे मुद्दे से अवगत कराया था। बाद में दोनों अधिकारियों को बुलाकर बातचीत कराई गई। अब ऐसी कोई बात नहीं है।
- शत्रुघ्न सिंह, मुख्य सचिव