दीपावली के उपलक्ष्य में आयोजित नवोदित प्रवाह कवि गोष्ठी में सुप्रसिद्ध कवियों ने अपनी कविता व गीतों की प्रस्तुति से जमकर रंग जमाया। पंडितवाड़ी में आयोजित गोष्ठी में देश के लब्धप्रतिष्ठ गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने अपनी कविता आग लाया हूं, रंग लाया हूं, गीत गाती उमंग लाया हूं... की प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने गीत तुम बदले संबोधन बदले, लेकिन मन की बात वही है, जाने क्यों मौसम के पीछे दिन बदले पर रात वही है... की प्रस्तुति से समा बांध दिया।
नवगीतकार असीम शुक्ल ने गीत सुनाते हुए नदी की यात्रा पर कहा, वह नदी जो तोड़कर सीमा नहीं बहती और अपना दर्द खुद से भी नहीं कहती.. की प्रस्तुति दी। इसके बाद गीतकार प्रो. रामविनय सिंह ने कविता कैसे जन्म लेती है पर अपने गीत जन्म-जन्म पूर्व की अपूर्व भाव चेतनाएं, होती घनीभूत जब आती कोई कविता... की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। वहीं, डॉ. सुधा पांडे, कवि डॉ. राकेश बलूनी, कवि और कथाकार डॉली डबराल, गीतकार नीता कुकरेती, गीतकार रामप्रताप मिश्र साकेती, गीतकार शिवमोहन सिंह, कवि चंदन सिंह नेगी, गजलकार डॉ. इंदु अग्रवाल और डॉ सुदेश ब्याला ने काव्यपाठ किया। गोष्ठी का संचालन रजनीश त्रिवेदी ने किया।
इस मौके पर अनिल अग्रवाल, सुनील त्रिवेदी, जनरल शम्मी सभरवाल, आदित्य कुमार सिंह, निखिल महाजन, अपराजिता ब्याला, तापस ब्याला, रासिगा रघुपति सुमन ब्याला आदि मौजूद रहे।