जौनसार बावर के सिद्धपीठ हनोल स्थित महासू देवता मंदिर व बाशिक महाराज मंदिर मैंद्रथ में देव स्नान के साथ शनिवार को जागड़ा पर्व का समापन हो गया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के रात लगाने (रात्रि जागरण) के बाद दोपहर में देव मूर्तियों को गर्भगृह में और देव चिह्नों को देवकुंड में स्नान करवाया गया। श्रद्धालुओं ने रातियें उजूई करि गोड़ी मुंज तेरे, हाथुं जोड़ी तौंऊंखे मेरी ढाल... प्रार्थना गाई। सबने मंदिर में दर्शन के बाद पवित्र जल का आचमन किया।
शुक्रवार को शुरू हुए राजकीय मेले जागड़ा में श्रद्धालुओं ने मंदिर में रात लगाई। महासू देवता मंदिर और बाशिक महाराज मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान-ध्यान किया। इस अवसर पर आटे, चीनी और घी से प्रसाद बनाया गया। सुबह 7:00 बजे नौबत बजने के बाद मंदिर परिसर में देव दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। दोपहर करीब 2:00 बजे हनोल मंदिर में देव मूर्ति को गर्भगृह के भीतर शाही स्नान करवाया गया। इसके साथ ही देव चिह्नों को शाही स्नान के लिए हनोल स्थित देवकुंड लाया गया।
बाशिक महाराज मंदिर में भी दोपहर 2:00 बजे देव चिह्नों को स्नान के लिए भूटियाड रोड के पास स्थित देवकुंड पर लाया गया। करीब 60 मीटर की चढ़ाई चढ़कर श्रद्धालु देवकुंड तक पहुंचे। देवकुंड में चिह्नों को शाही स्नान करवाया गया। उसके बाद कारिंदों ने देव चिह्नों को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए हनोल मंदिर और बाशिक महाराज मंदिर पहुंचाया। श्रद्धालुओं ने देव चिह्नों के दर्शन कर मनोकामना मांगी।
श्रद्धालुओं ने देवता का प्रसाद ग्रहण कर पवित्र जल का आचमन किया। शाम करीब 4:00 बजे देव चिह्नों वापस मंदिर के गर्भगृह में ले जाया गया। शाम करीब 4:50 बजे शाम की नौबत बजे के समय मंदिर के कारिंदों और हक-हकूकधारियों ने क्षेत्र में सुख और शांति के लिए महासू देवता से प्रार्थना की।