I
Iपिछले साल रानीपोखरी थाने में दर्ज हुआ था मुकदमाI
Iदुष्कर्म और अपहरण के मामले में नाबालिग पीड़िता अदालत में गवाही देने पहुंची तो आरोपी को सिर्फ अपना फेसबुक दोस्त बताया। बोली, वह न तो दोस्त के साथ हरिद्वार गई थी, न ही उससे दुष्कर्म हुआ।I
Iअदालत में दाखिल पुलिस के आरोप पत्र के अनुसार, पीड़िता को आरोपी प्यार की दुहाई देकर अपने साथ हरिद्वार ले गया था। वहां एक होटल में दुष्कर्म किया। पीड़िता ने अदालत को बताया कि वह कथित वारदात वाले दिन अपनी सहेली के घर गई थी। उसने पुलिस जांच में अपहरण या दुष्कर्म जैसी कोई बात नहीं कही। इस गवाही के बिनाह पर अदालत ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया।I
Iमामला रानीपोखरी थाने में पिछले साल लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज हुआ था। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी अभिषेक मनवाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत वैध संरक्षकता से किशोरी का अपहरण और पॉक्सो अधिनियम की धारा 17/18 के तहत दुष्कर्म के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था।
I
Iअभियोजन पक्ष ने गवाही के लिए पीड़िता को अदालत में पेश किया तो वह पिछले बयान से मुकर गई। अदालत को बताया कि वह आरोपी को सिर्फ फेसबुक से जानती थी। पुलिस ने यह गलत बयान लिखा कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर हरिद्वार ले गया था। पीड़िता ने बताया कि वह तो अपनी सहेली के घर गई थी क्योंकि उसके परिवार वाले उसे पढ़ाई के लिए ताने मारते थे। इस संबंध में पूर्व में बयान पुलिस के दबाव में दिए गए थे। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि अभियुक्त ने पीड़िता का अपहरण या उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता और उसके पिता ने अभियुक्त के खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया। पुलिस के बयानों में भी विसंगतियां पाई गई हैं। इन तथ्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश अर्चना सागर ने आरोपी अभिषेक मनवाल को बरी कर दिया।I