बारिश की तेज रफ्तार पानी प्रदेश की 626 पेयजल परियोजनाएं बहा ले गया है। इससे 16.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मानसून आने के पहले जलस्रोतों के सूखने के कारण पेयजल संकट पैदा हुआ था और अब बारिश आई है तो परियोजनाओं के बह जाने से समस्या खड़ी हो गई है। बारिश के पानी से इन परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए महकमे ने खास तैयारी भी नहीं की थी।
सूखे के कारण प्रदेश के विभिन्न जनपदों में साढ़े तीन सौ परियोजनाएं ठप हो गई थीं। उस वक्त ये पेयजल परियोजनाएं सहारा बनीं थीं, जिन्हें अब बारिश बहाकर ले गई है। बारिश के मौसम में देहरादून समेत प्रदेश के 11 जिलों में समस्या पैदा हो गई है।
बारिश के पानी के अलावा ऊंचाई से खिसक कर नीचे आया मलबा भी अपने साथ कई परियोजनाओं को समेट ले गया है। जून के आखिरी हफ्ते से अब तक 626 पेयजल परियोजनाओं को बारिश ने बहाया है।
बारिश और मिट्टी धसकने से पेयजल परियोजनाओं का सारा सामान भी बह गया है। इन्हें दुबारा दुरुस्त करने के लिए फिर से पाइप आदि सामान ऊपर पहुंचाना पड़ेगा। जिन जिलों में परियोजनाएं बह गई हैं, वहां शासन ने नई परियोजनाएं भी प्रस्तावित की हैं।
कई परियोजनाओं का बजट भी आवंटित कर दिया गया है, लेकिन लेटलतीफी के कारण काम शुरू नहीं हो पाया और बारिश आ गई। नई पेयजल परियोजनाएं न बन पाने और पुरानी परियोजनाओं के बह जाने से और मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इन क्षेत्रों में कई बड़ी पेयजल परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं, लेकिन केंद्र से पैसा न मिलने के कारण इनका काम भी अटका रहा।
बह गईं पेयजल परियोजनाएं
देहरादून-37, पौड़ी-42, चमोली-115, रुद्रप्रयाग-52, टिहरी-117, उत्तरकाशी-107, पिथौरागढ़-56, चंपावत-3, बागेश्वर-24, नैनीताल-40, अल्मोड़ा-33
मौके पर टीमें भेज दी गई हैं। पाइप लाइन मुहैया कराकर अस्थायी रूप से परियोजनाओं को शुरू किया जा रहा है, जिससे लोगों को दिक्कत न हो। बारिश और भूस्खलन में परियोजनाएं बह गई हैं।
- एसके गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, जलसंस्थान उत्तराखंड