इसे बदनसीबी ही कहेंगे कि गर्भवती पत्नी को अस्पताल ले जाने के लिए पति को उसे कुर्सी पर बांधकर 17 किलोमीटर तक पहाड़ लांघने पड़े। तब जाकर अस्पताल मिला।
सुदूरवर्ती ओखलकांडा ब्लाक में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। विकासखंड के कुकना ग्रामसभा निवासी एक गर्भवती को इलाज उपलब्ध कराने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को 17 किलोमीटर की यात्रा पैदल ही तय करनी पड़ी।
इस दौरान बीमार गर्भवती महिला को कुर्सी पर बैठाकर गांव से रोड हेड तक पहुंचाया गया और उसके बाद पड़ोस के चंपावत जिले के सीएचसी में महिला को इलाज नसीब हुआ। अस्पताल में गर्भवती ने बेटी को जन्म दिया।
कुकना गांव निवासी प्रकाश सिंह की पत्नी दीपा देवी (26) गर्भवती थी। बृहस्पतिवार सुबह दीपा देवी को प्रसव पीड़ा उठी, लेकिन गांव में दूर-दूर तक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
लिहाजा परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से दीपा देवी को इलाज के लिए पड़ोस के चंपावत जिले के पाटी ब्लाक में स्थित सीएचसी में ले जाने का फैसला किया। ग्राम प्रधान मदन सिंह नौलिया ने बताया कि गर्भवती दीपा देवी को बृहस्पतिवार सुबह कुर्सी पर बैठाकर लगभग 17 किलोमीटर दूर पैदल ढोलीगांव ले जाया गया।