न्यायिक मजिस्ट्रेट जतिन मित्तल की अदालत ने दहेज उत्पीड़न, मारपीट और धमकी के मामले में रामपुर कलां (सहसपुर) निवासी आरोपी जहांगीर को बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास और ठोस साक्ष्यों की कमी का लाभ आरोपी को मिला।
मामले के अनुसार, साजिदा का निकाह वर्ष 2002 में जहांगीर से हुआ था। आरोप था कि पति और ससुर अब्दुल रज्जाक दहेज में बाइक व 10 हजार रुपये की मांग को लेकर उससे मारपीट करते थे। आरोप के मुताबिक, 2014 में मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया गया, जिसके बाद 27 जनवरी 2015 को सहसपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले की सुनवाई के दौरान छह जून 2024 को ससुर की मृत्यु होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।
न्यायालय ने साक्ष्यों के विश्लेषण में पाया कि 2004 से 2014 के बीच मारपीट या दहेज मांगने की कोई स्पष्ट रिपोर्ट या ठोस साक्ष्य पत्रावली पर मौजूद नहीं है। किस आरोपी ने कब दहेज मांगा और कब धमकी दी, इसका भी कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। इन्हीं त्रुटियों के चलते न्यायालय ने आरोपी जहांगीर को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।