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मानवता ही न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला : कुसुम

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देहरादून। कानून अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन मानवीय मूल्यों के बिना न्याय की परिकल्पना अधूरी है। मानवता और नैतिकता ही किसी भी समाज को सही दिशा देने वाले मूल आधार हैं। यह बातें शुक्रवार को ग्राफिक एरा डीम्ड विवि में मानवाधिकारों पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहीं।
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राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य एचसी सेमवाल ने मानवाधिकारों के संरक्षण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और न्याय सुनिश्चित करने में मानवाधिकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व रजिस्ट्रार जनरल वीके माहेश्वरी ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव और ज्ञान समाज की अमूल्य धरोहर है, इसलिए उनकी सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करना कानूनी व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक दायित्व भी है। उन्होंने छात्रों को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी। सम्मेलन में डाॅ. अमित आर भट्ट, डाॅ. अशुतोष हजेला, डाॅ. शैलजा ठाकुर, मनीष प्रताप सिंह, शांतनु शेखर आदि मौजूद रहे।
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