जल विद्युत परियोजना कार्य से सिंचाई व्यवस्था बाधित होने और पीड़ित दलित व्यक्ति को समुचित मुआवजा न दिए जाने पर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग ने टिहरी के डीएम से जवाब मांगा है। डीएम को दो माह के भीतर आयोग को जवाब देना करना होगा।
टिहरी जिले के ग्राम जोशियाड़ा निवासी सुंदरलाल ने आयोग में शिकायत कर बताया कि वह अनुसूचित जाति का व्यक्ति है। चौरी में उसकी लगभग तेरह नाली जमीन है। इस जमीन के किनारे बहने वाला सदाबहार जल स्रोत वर्ष 2007 में भिलंगना जल विद्युत परियोजना के कार्य से बंद हो गया। सिंचाई का पानी बंद होने से ये भूमि बंजर हो गई है।
खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट
उन्होंने बताया कि इससे उनकी रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। वर्ष 2010 में तहसील के कई चक्कर काटने के बाद प्रशासन ने दो पटवारियों से जांच कराई। जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि सदाबहार बहता पानी परियोजना के निर्माण कार्य की वजह से सूखा है।
पीड़ित ने शेष प्रतिकर दिलाने और सिंचाई की व्यवस्था कराने की गुहार लगाई। एसडीएम घनसाली ने सन् 2008 से 11 तक उक्त जमीन के फसलों का प्रतिकर 58 हजार रुपये प्रभावित व्यक्ति सुंदरलाल को देने का परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिया।
उसके बाद भी भिलंगना जल परियोजना ने सुंदरलाल को मात्र 15 हजार रुपये दिए। आयोग के सदस्य जस्टिस राजेश टंडन ने मामले की सुनवाई करते हुए डीएम को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई तीन मार्च को होगी।