वित्तीय संकट के प्रचंड दबाव में भी उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार लोकप्रिय फैसलों के मोह से मुक्त नहीं हो पाई है। प्रचंड बहुमत की सरकार होने के बावजूद कर्मचारियों के वित्तीय लाभ देने के मामले में वह भी उतनी ही उदार है, जितनी अब तक अल्पमत की सरकारें रहीं।
विचित्र संयोग है कि आज सरकार ने एक हाथ से 500 करोड़ रुपये का कर्ज उठाया और दूसरे हाथ से 600 करोड़ रुपये सातवें वेतनमान का एरियर चुका दिया। अब तक प्रदेश सरकार 2700 करोड़ रुपये का कर्ज उठा चुकी है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से प्रदेश सरकार ने दिसंबर महीने तक के लिए करीब 3800 करोड़ रुपये के ऋण उठाने की अनुमति ले रखी है। जरूरी नहीं कि सरकार इतना कर्ज उठाए। मगर सरकार की वर्तमान वित्तीय स्थिति बेहतर नहीं मानी जा रही है। ऐसे कठिन वक्त में उसके पास अच्छे वित्तीय प्रबंधन के लिए दो ही विकल्प हैं। पहला वह अपनी आमदनी बढ़ाए। दूसरा, अपने खर्चों में कटौती करे। मगर दोनों ही मोर्चों पर सरकार का रिकार्ड अभी अच्छा नहीं है, जबकि प्रचंड बहुमत की सरकार से कठिन फैसले लेने की उम्मीद की जा रही थी।
नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू होने से सरकार की आमदनी पर बुरा असर पड़ा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन देने के लिए सरकार को ऋण लेना पड़ रहा है। केंद्र पोषित योजनाओं में राज्य के हिस्से की राशि जमा करने के लिए भी उसे धनराशि की दरकार है। उसे कर्मचारियों के वेतन, पेंशन एवं मजदूरी के लिए हर महीने करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारियों के बोनस, डीए और अब एरियर को मंजूरी दी है। पिछले एक पखवाड़े में सरकार ने करीब एक हजार करोड़ रुपये की स्वीकृतियां जारी की हैं। इनमें 272 करोड़ 50 लाख रुपये निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को चतुर्थ वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रम में जारी किए। फिर समाज कल्याण की वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के एवज में 341 करोड़ रुपये की राशि जारी की। इसके अलावा अन्य मदों में भी वित्तीय स्वीकृतियां हो रही हैं। उसे विधायक निधि के लिए भी बढ़ी हुई धनराशि जारी करनी है।
कर्मचारियों के प्रतिबद्ध देय देने में सरकार को कोई कठिनाई नहीं है। कर्ज लेना बुरा नहीं है। बुरा यह है कि कर्ज का इस्तेमाल पूंजीगत व्यय में हो रहा है या राजस्व व्यय में। केंद्र पोषित योजनाओं में सरकार को राज्य का अंशदान देना होता है। इसे समय पर जारी करने के लिए धनराशि चाहिए होती है। हम सरकार की आमदनी बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। कामयाब रहे तो कर्ज को सीमित करेंगे।
- प्रकाश पंत, वित्त मंत्री