पर्यटन के क्षेत्र में देहरादून की अपनी पहचान है। स्वच्छ हवा हो या खूबसूरती, हिमालय की तलहटी में बसा यह शहर खुद को औरों से आगे खड़ा पाता है। पहाड़ों से घिरे, हरे-भरे जंगल और मौसम दून को सबसे अलग करते हैं। वहीं, बात स्वच्छता की होने पर यह शहर पिछड़ता नजर आता है। कुदरती सौंदर्य से भरपूर होने के बाद भी दून को वह मुकाम हासिल नहीं हो पा रहा, जो होना चाहिए। इसके लिए सरकारी मशीनरी ही नहीं आप और हम भी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।
तुलना देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से करें तो, वर्ष 2016 में पहले स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर 25वें स्थान पर था, लेकिन इसके बाद लगातार छह साल से वह पहले पायदान पर बना हुआ है। इन सालों में हालांकि दून भी 384वें स्थान से छलांग लगाकर 69वें पायदान पर पहुंच गया है। इस बार नगर निगम ने दून के शहर को टॉप-50 शहरों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए अभी बहुत बड़ा सफर तय कराना है। वर्तमान में दून में सफाई व्यवस्था की जो हालत है, उससे निगम के सामने पुरानी रैंकिंग को ही बरकरार रखना चुनौती बना हुआ है। ऐसा नहीं कि नगर निगम के पास संसाधनों की कमी हो, इच्छाशक्ति की कमी और लोगों का अपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण स्वच्छता के मामले में दून वह मुकाम हासिल नहीं कर पा रहा है, जो होना चाहिए।
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इस मुहिम में आप भी सहभागी बनें
इंदौर की तर्ज पर दून को पहले पायदान तक पहुंचाने के लिए अमर उजाला एक मुहिम शुरू करने जा रहा है। इस मुहिम में नगर निगम की चूक को उजागर करने के साथ ही लोगों से भी अपने शहर को स्वच्छता के शीर्ष मुकाम तक पहुंचाने के लिए सुझाव लिए जाएंगे। अपने शहर को शीर्ष पायदान पर पहुंचाने के लिए आप अपना सुझाव उजाला को भेज सकते हैं।I
नगर निगम दून लगातार स्वच्छता के मुकाम पर बेहतर कर रहा है। इस वर्ष भी निगम शहरवासियों के साथ मिलकर स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैकिंग पाने के लिए प्रयासरत है, उम्मीद है इस बार दून की रैंकिंग में बड़ा उछाल आएगा।
सुनील उनियाल गामा, मेयर, देहरादून नगर निगमI