आय बढ़ाने के लिए देहरादून नगर निगम शहर के पुराने भवनों से ज्यादा टैक्स वसूलने की योजना बना रहा है।
शहर के करीब 50,000 पुराने भवनों का टैक्स आकलन कर निगम उन्हें नए भवनों पर लागू सेल्फ एसेसमेंट के दायरे में लाने की तैयारी में है। निगम को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने से उसे हर साल करीब 14 करोड़ की कुल आय होगी।
बता दें कि करीब एक साल पहले नगर निगम ने शहर के नए भवनों पर सेल्फ एसेसमेंट के तहत टैक्स लगाने की शुरुआत की है। निगम को नए भवनों से ही करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए हर साल आय होने का अनुमान है।
अगर पुराने भवन भी सेल्फ एसेसमेंट के तहत टैक्स देने लगेंगे तो निगम को पुराने भवनों से ही करीब 6 करोड़ रुपये की सालाना आमदनी होगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में नगर पालिका ने शहर में भवनों का आकलन किया था। उस वक्त करीब 50,000 भवनों पर न्यूनतम टैक्स लगाया गया था। इसके लिए रेंटल बेसिस पद्धति को आधार बनाया गया था। इसके बाद कुछ सालों में कई पुराने भवनों को तोड़कर नए भवन बनने लगे।
कई भवनों का व्यावसायिक उपयोग किया जाने लगा है तो कई भवनों को किराए पर दिया जाने लगा। अब नगर निगम पुराने भवनों पर भी नए भवनों पर लागू सेल्फ एसेसमेंट व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। अगर यह योजना परवान चढ़ी तो करीब 18 साल बाद जाकर पुराने भवनों पर टैक्स का आकलन होगा।
तीन चरणों में लागू होगी व्यवस्था
- पहला चरण - 70,000 नए भवन चिह्नित किए गए
- दूसरा चरण - पुराने भवनों को तोड़कर बनाए गए 10 हजार नए भवन निर्माण का आकलन किया जा रहा है
- तीसरा चरण - जो भवन पहले से रेंटल बेसिस पर टैक्स दे रहे हैं, उन्हें सेल्फ एसेसमेंट के दायरे में लाया जाएगा
शहर के करीब 50,000 पुराने भवनों को नए भवनों की तरह ही सेल्फ एसेसमेंट टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी है। ऐसा होने से निगम को पुराने भवनों से ही अच्छी खासी आय होगी। जल्द ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- विनोद चमोली, मेयर नगर निगम
दुकान होगी तो ज्यादा टैक्स
पुराने भवनों का टैक्स आकलन सालों से नहीं हुआ है। इस अवधि में हजारों पुराने भवनों का कुछ हिस्सा व्यावसायिक हो गया है। कहीं पर दुकानें खुल गईं हैं तो कहीं स्कूल चल रहा है।
किसी आवासीय भवन में कोचिंग संस्थान चल रहा है तो किसी में मेडिकल स्टोर की दुकान खुली है। निगम के रिकार्ड में ऐसे भवनों का टैक्स आवासीय के तौर पर दर्ज है। नए सिरे से टैक्स एसेसमेंट होगा तो व्यावसायिक हिस्से का टैक्स अलग तय किया जाएगा और आवासीय हिस्से का टैक्स अलग तय होगा। ऐसी स्थिति में टैक्स काफी बढ़ सकता है।
बोर्ड की बैठक में पहले आएगा प्रस्ताव
पुराने भवनों में टैक्स लगाने की प्रक्रिया आसान नहीं है। पहले प्रस्ताव नगर निगम की बोर्ड बैठक में लाना होगा। बोर्ड से प्रस्ताव पास होने के बाद पुराने भवनों के लिए टैक्स की दरें तय की जाएंगी। टैक्स की दरें भी सड़कों और गलियों की चौड़ाई और क्षेत्र की लोकेशन के आधार परी तय होंगी।
दरें तय होने के बाद उसका प्रकाशन किया जाएगा। फिर लोगों से आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद पुराने भवनों पर हाउस टैक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी।