घटना की जानकारी मिलने पर कांडा तहसील से अधिकारी और कर्मचारी ढनौलासेरा पहुंचे। घायलों को लोग आधा किमी दूर सड़क तक कंधे और डोलियों में ढोकर लाए। वहां से 108 वाहन के जरिए 8 किमी दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांडा ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल मदन सिंह, राजेंद्र सिंह, मोहनी देवी, देवकी देवी और भागुली देवी को बागेश्वर के जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
कांडा अस्पताल की महिला चिकित्सक डॉ. सम्मी उनेसा, डॉ. भारद्वाज, रोहित, मीरा बोरा की टीम ने सभी घायलों का उपचार किया। कांडा के एसडीएम योगेंद्र सिंह, तहसीलदार मैनपाल सिंह, थानाध्यक्ष गोविंद बल्लभ भट्ट समेत पिथौरागढ़ के जिला प्रशासन ने भी मौका मुआयना कर घायलों की कुशलक्षेम पूछी।
मिली जानकारी के अनुसार गृह स्वामी मदन सिंह (65) लंबे समय से बीमार थे। इलाज के बाद भी जब उनको कोई लाभ नहीं हुआ तो परिवार के लोगों ने पूजा कराने की सोची। घटना के समय घर में पूजा चल रही थी। देव डांगरों का अवतरण हो रहा था। इसी दौरान घर की पाल टूट गई और मदन सिंह के साथ ही अन्य ग्रामीण हादसे का शिकार हो गए। गांव के एक बुजुर्ग की मौत हो गई। ढनौलासेरा पिथौरागढ़ जिले का अंतिम गांव है। इस गांव में स्वास्थ्य सुविधा नाम की कोई चीज नहीं है।
स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में गांव के लोग अक्सर देवडांगरों का सहारा लेते हैं। यही कारण है कि मदन सिंह की बीमारी में भी देवडांगरों का ही सहारा परिजन ले रहे थे। केवल देवडांगरों के भरोसे बीमारी के ठीक होने की कल्पना करना मूर्खता ही कहलाएगा लेकिन सवाल यह भी है कि सरकार कब ढनौलासेरा जैसे सीमांत के गांवों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। कब इस तरह के हादसे देखने को नहीं मिलेंगे।