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50 बेड वाले अस्पतालों को हर साल रजिस्ट्रेशन से छूट दी जाए : आईएमए

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सरकार की ओर से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत 50 से कम बेड वाले छोटे अस्पताल और क्लीनिकों का पंजीकरण शुल्क खत्म कर दिया गया है। वहीं, 50 से अधिक बेड के अस्पताल के पंजीकरण शुल्क में 90 फीसदी तक छूट दी गई है। आईएमए उत्तराखंड ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। इसके साथ ही कुछ और मांग भी सरकार से की हैं।
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मंगलवार को आईएमए उत्तराखंड की ओर से आईएमए ब्लड बैंक में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा गया कि 50 बेड वाले क्लीनिक व अस्पतालों को सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशन करवाना पड़े। हर साल रजिस्ट्रेशन का नवीनीकरण न करवाना हो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार से यह मांग की जा रही है। रजिस्ट्रेशन में एक दिन की भी देरी होती है तो एक दिन का 100 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। हर साल नवीनीकरण वाले अस्पतालों से यह जुर्माना नहीं लिया जाना चाहिए। इसकी शिकायत शासन से की गई है। इसे बंद करना चाहिए। डॉक्टर की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी एक्ट बनाना चाहिए। प्रेसवार्ता में नेशनल आईएमए हेड क्वार्टर में स्टेट कॉर्डिनेटर डॉ. डीडी चौधरी, उत्तराखंड आईएमए के कोषाध्यक्ष और देहरादून आईएमए के अध्यक्ष डॉ. संजय उप्रेती, देहरादून आईएमए के सचिव डॉ. अंकित पाराशर मौजूद रहे।

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फर्जी डॉक्टरों को न दें बढ़ावा
उत्तराखंड के आईएमए जनरल सेक्रेटरी डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि अस्पताल के स्थायी रजिस्ट्रेशन के लिए मानक तय करने चाहिए। इसके अलावा उत्तराखंड में स्थिति यह है कि कोई व्यक्ति पैसे लगाकर अस्पताल खोल देता है और रजिस्ट्रेशन के लिए निजी अस्पताल के डॉक्टर की वहां पर डिग्री लगा दी जाती हैं। ऐसे डॉक्टरों से आईएमए की अपील है कि सही जगह प्रैक्टिस करें। फर्जी डॉक्टरों को बढ़ावा न दें। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल इस पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है।
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