पुलिस ने फर्जी तरीके से निजी अस्पताल चला रहे ‘मुन्नाभाई’ को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ दो वर्ष पहले देहरादून में मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार ने मुकदमा दर्ज कराया था। गिरफ्तारी के डर से आरोपी ने रुद्रपुर में खोले गए अस्पताल को बंद कर दिनेशपुर क्षेत्र में अस्पताल खोल लिया था। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है।
वर्ष 2015-16 में यशवंत कुमार निवासी हजरतगंज, लखनऊ (जो फर्जी दस्तावेज में दर्ज है) ने सिविल लाइंस में कैलाश अस्पताल एवं ट्रामा सेंटर खोला था। यशवंत ने उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए अपनी डिग्री के साथ ही यूपी मेडिकल काउंसिल से जारी रजिस्ट्रेशन भी संलग्न किया था।
जांच के दौरान डिग्री सहित अन्य दस्तावेज फर्जी मिलने पर मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. वाईएस बिष्ट ने देहरादून में यशवंत के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। एक वर्ष पहले देहरादून पुलिस ने घटनास्थल रुद्रपुर बताकर विवेचना को ट्रांसफर कर दिया था। विवेचक/एसआई श्यामलाल विश्वकर्मा ने बताया कि दो माह पहले विवेचना उनके पास आई तो जांच में पता चला कि यशवंत कैलाश अस्पताल को बंद करने के बाद जयनगर (दिनेशपुर) में डिवाइन सिटी नाम से अस्पताल चला रहा था। सोमवार देर शाम अस्पताल में दबिश देकर आरोपी यशवंत को गिरफ्तार कर लिया गया।
डिग्री से लेकर पता तक फर्जी
रुद्रपुर। पुलिस की गिरफ्त में आया यशवंत बेहद शातिर है। उसने डिग्री, यूपी मेडिकल काउंसिल का सर्टिफिकेट तो फर्जी दिया ही था, साथ ही इंटर्नशिप के दस्तावेज और पता भी झूठा था। विवेचक श्यामलाल ने बताया कि मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए जमा कराए गए दस्तावेजों में यशवंत ने जियामऊ थाना हजरतगंज (लखनऊ) का पता दर्शाया था, जो जांच में फर्जी पाया गया। इसके अलावा, फैजाबाद से की गई इंटर्नशिप के कागजात भी फर्जी निकले थे। आरोपी के वास्तविक पते की जानकारी नहीं मिल पाई है।