हरिद्वार जनपद के श्यामपुर क्षेत्र के गैंडीखाता में वन गुर्जरों के पुनर्वास के तहत दस वर्ष पहले बनाए गए चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग की ओर से आज तक कोई डाक्टर नहीं पहुंच सका है। लाखों की लागत से बना यह खाली पड़ा भवन भी अब जीर्ण शीर्ण हालत में पहुंच चुका है।
यूपी सरकार की ओर से 1992 में 878 वन गुर्जर परिवारों को वन गुर्जर पुनर्वास के तहत राजाजी नेशनल पार्क से गैंडीखाता गांव की गुर्जर बस्ती में बसाया गया था। वहीं उनके लिए अस्पताल आदि की व्यवस्था भी थी।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
आबादी अधिक होने के कारण सरकार ने गुर्जर बस्ती में एक सरकारी अस्पताल और एक पशु चिकित्सालय भी बनाया था, लेकिन सरकार और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आलम देखिए दस साल पहले बनाए गए अस्पतालों में आज तक कोई चिकित्सक मरीजों का इलाज करने के लिए नहीं पहुंच सका।
यह अस्पताल पिछले दस सालों से बंद पड़ा हुआ है। रखरखाव न होने के कारण अस्पताल की नई इमारत आज बेहद जर्जर हालत में पहुंच गई है।
मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित
गुर्जर बस्ती के बाबू खटाना, नूर आलम, गामा, रोशन दीन, रूप चौधरी, इरशाद भड़ाना, आजाद आदि का कहना है कि सरकार ने हमें राजाजी पार्क से निकालने के दौरान बडे़-बडे़ वादे किए थे, लेकिन आज हमें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले कई सालों से अस्पतालों को चालू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन ना तो सरकार सुनने को तैयार है और न ही विभाग सुनता है। जिसके कारण हमें भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।