प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे जांच का दावा हवाई साबित हो रहा है। एक भी सरकारी अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे जांच की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिकल कॉलेज का टीचिंग अस्पताल होने के चलते केवल श्रीनगर और हल्द्वानी में यह जांच हो रही है। अन्य अस्पतालों में मरीजों की चार घंटे भी जांच नहीं हो पा रही है। इसके लिए सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति के साथ ही लैब टेक्नीशियनों की कमी को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
पिछले वर्ष सरकार ने सभी सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे पैथोलॉजी समेत अन्य जांच उपलब्ध कराने का दावा किया था। मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पतालों में यह व्यवस्था अनिवार्य है। इसके चलते पहले से चल रहे श्रीनगर और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जांच हो रही है। लेकिन, इसी वर्ष अस्तित्व में आए दून मेडिकल कॉलेज के साथ प्रदेश के एक भी सरकारी अस्पताल में भी यह जांच नहीं हो रही है।
केवल साढ़े तीन घंटे जांच
सरकार के 24 घंटे जांच के दावे के विपरीत अस्पातलों में केवल साढ़े तीन घंटे ही मरीजों को पैथोलॉजी जांच की सुविधा मिल रही है। सभी सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी केवल एक ही शिफ्ट में काम करती है। इसमें सुबह आठ से पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे तक सैंपल लेने का समय है। उसके बाद दो बजे तक सैंपल की जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
मुफ्त जांच, दवा के दावे भी हवा
सरकार पिछले करीब दो वर्ष से सरकारी अस्पतालों में मुफ्त जांच और दवा वितरण का दावा कर रही है। हालांकि यह दावा अभी तक हकीकत में तब्दील नहीं हो सका है। अब कुछ दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने एक बार फिर एक अक्तूबर से मुफ्त जांच और दवा उपलब्ध कराने का दावा किया है।
प्रदेश में मौजूदा व्यवस्था के अनुसार ही लैब टेक्नीशियनों के पद बड़ी संख्या में खाली हैं। 24 घंटे जांच के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती करनी होगी। मौजूदा व्यवस्था में यह संभव नहीं है।
-राकेश रावत, अध्यक्ष, लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन
24 घंटे जांच की व्यवस्था बनाई जा रही है। मुफ्त जांच और दवा वितरण को लेकर तैयारियां की जा रही है। एक अक्टूबर से योजना शुरू कर दी जाएगी।
-डॉ. कुसुम नरियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक