वयोवृद्ध गौरव सेनानी ऑनरेरी कैप्टन (सूबेदार मेजर) माधो सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह हल्द्वानी स्थित उनके आवास लाया गया। यहां सेना के जवानों ने पुष्प चक्र अर्पित किए। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि 20 फरवरी को कैप्टन माधो सिंह का 101वां जन्मदिन मनाया गया था। वहीं, माधो सिंह के बेटे रंजीत सिंह ने बताया कि उनके तीन अन्य छोटे भाई वीरेंद्र सिंह बिष्ट, गजेंद्र सिंह बिष्ट और भूपेंद्र सिंह बिष्ट के अलावा दो बहनें हैं।
माधो सिंह ने अपने ताऊ धन सिंह के साथ पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। युद्ध के दौरान ताऊ वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर (रि.) बीएस रौतेला के अनुसार माधो सिंह हैदराबाद रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। जब पैरा बटालियन का गठन हुआ तो वे पैरा कुमाऊं में शामिल हुए। आजादी के तुरंत बाद कश्मीर में पाकिस्तानी घुस आए।
उन्हें खदेड़ने के लिए ऑपरेशन चलाया गया। माधो सिंह की पल्टन पुंछ क्षेत्र में तैनात थी। माधो सिंह के साथ उनके ताऊ धन सिंह भी थे। युद्ध के मैदान में दोनों जांबाजों ने अदम्य साहस का परिचय दिया लेकिन धन सिंह मातृ भूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। युद्ध समाप्ति के बाद दोनों को वीर चक्र से अलंकृत किया गया।