उत्तराखंड में जंगल से सटे आबादी वाले इलाकों में धान और गन्ने की फसल बर्बाद करने वाले हाथियों का झुंड भगाना वन विभाग के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है।
इस काम में वन अधिकारियों ने पहले तो बाघ की रिकॉर्डेड आवाज से उन्हें भगाने का प्रयास किया, लेकिन जल्द ही हाथियों ने असली और नकली आवाज में फर्क समझ लिया। इसीलिए अधिकारियों ने अब हाथियों की घुसपैठ रोकने के लिए मधुमक्खियों का सहारा लेने का निश्चय किया है।
केंद्र सरकार की कैंपा योजना के तहत यह काम किया जाएगा। डीएफओ डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बाघ की आवाज का टेप चलाने पर शुरुआत में तो हाथी डर कर भागे, लेकिन हाथी सबसे ज्यादा अक्लमंद वन्यजीव होता है इसलिए वह दहाड़ का अंतर समझ गया। हालात यह हो गए कि खेतों में फसलों को हाथियों से जबरदस्त नुकसान होने लगा।