उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के होमगार्डों को पुलिसकर्मियों के बराबर ड्यूटी अलाउंस देने का निर्देश दिया है। इस बाबत दायर एक याचिका में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन माह के भीतर इसे लागू करने के लिए कहा है। इस आदेश से राज्य के 6411 होमगार्डों को बड़ा फायदा होगा।
वहीं, सरकारी खजाने पर लगभग पचास करोड़ का बोझ आएगा। देहरादून निवासी शिव प्रसाद शर्मा और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे नगर निगम देहरादून में प्लाटून कमांडेंट और होमगार्ड के पद पर तैनात हैं।
सरकार की ओर से 16 सितंबर 2016 को अधिसूचना जारी कर होमगार्ड के न्यूनतम वेतन में 300 से लेकर 400 रुपये तक की वृद्धि की गई है। इस अधिसूचना को याचिकाकर्ताओं की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा था कि होमगार्ड को 400 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वेतन दिया जाता है। इससे होमगार्डों का गुजारा नहीं हो सकता। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने बृहस्पतिवार को दिए अपने फैसले में राज्य सरकार को तीन माह के भीतर होमगार्डों को पुलिसकर्मियों के बराबर ड्यूटी अलाउंस देने के निर्देश दिए।
गौरतलब है कि राज्य में 6411 होमगार्ड हैं, जिन्हें चार सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से महीने में लगभग 12 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। हाईकोर्ट के आदेश के हिसाब से अब होमगार्डों का औसत वेतन लगभग 21 हजार रुपये होगा, क्योंकि अब उन्हें पुलिसकर्मियों के बराबर बेसिक-पे के साथ महंगाई और वॉशिंग अलाउंस मिलेगा। पूर्व में भी होमगार्ड महकमे की ओर से एक प्रस्ताव राज्य सरकार को दिया गया था, जिसमें समान वेतन देने की बात कही गई थी।
उस वक्त इस मद में लगभग 36 करोड़ रुपये का खर्च आना था, मगर सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद अब पचास करोड़ का खर्च आएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने विजन डॉक्युमेंट के पेज नंबर पंद्रह पर भी होमगार्डों का वेतन-भत्ता बढ़ाने की बात कही थी। उधर, पंजाब के अलावा हिमाचल, मध्य प्रदेश और हरियाणा में पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए होमगार्डों को पुलिस के जवान के बराबर वेतन दिया जा रहा है।