हरिद्वार, रुड़की में बनी लैब में सैंपल भेजे जाएंगे
पीसी जोशी ने बताया कि अब हरिद्वार, रुड़की में बनी नई लैब में सर्विलांस वाले सैंपल भेजे जाएंगे। दुकानों पर जांच करते समय अगर कोई खाद्य पदार्थ खराब लगता है या आशंका होती है कि यह पूरी तरह से खराब है तो उसे वहीं पर नष्ट कराया जाता है। यह निर्णय पूरी टीम मिलकर लेती है। अगर आशंका होती है कि खाद्य पदार्थ खाने के अनुकूल नहीं है तो सैंपल लेकर लैब भेजा जाता है। इसके अलावा दुकानदार को मना कर दिया जाता है कि इस खाद्य पदार्थ को नहीं बेचेगा।
ऐसे की जा रही मिलावट
पनीर बनाने के लिए प्रयोग किए जा रहे दूध में तेल, कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी मिलाई जा रही है। सूरजमुखी का तेल, खाद्य तेल, सपरेटा दूध, कैस्टर ऑयल आदि की मिलावट कर पनीर बनाया जा रहा है। सैंपल में भी इसकी पुष्टि हुई है।
जब दूध महंगा तो कैसे मिल सकता सस्ता पनीर
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार एक किलो पनीर बनाने के लिए पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट संभावना रहती है।
वसा युक्त पदार्थ पाचन में समय लेते हैं। एनिमल फैट पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। जहां तक संभव हो विश्वसनीय दुकान से दूध खरीदकर घर पर ही मावा तैयार करें।
- डाॅ. एनएस बिष्ट, असिस्टेंट प्रोफेसर, दून अस्पताल