हरिद्वार में बीते साल होली के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। खाद्य सुरक्षा विभाग खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोकने के लिए अभियान चलाता है। प्रदेश में एक मात्र जांच लैब और संसाधनों की कमी के चलते सैंपलिंग केवल खानापूर्ति तक सीमित रह गई है। हाल यह है कि बीते साल विभाग ने 193 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे। इनमें से केवल 45 की जांच रिपोर्ट ही विभाग को मिल पाई है।
दुकानों में गुणवत्तापरक और शुद्ध खाद्य पदार्थों बिक्री की जाए, इसकी निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। त्योहारी सीजन में मिलावटी पदार्थों की आपूर्ति और बिक्री को रोकने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जाता है। सैंपलिंग केवल रस्म अदायगी बनकर रह गई है।
पूरे प्रदेश में रुद्रपुर में एकमात्र जांच लैब है, उसमें भी केवल एक ही विशेषज्ञ तैनात है। ऐसे में समय पर खाद्य पदार्थों की जांच नहीं हो पा रही है। जिसका नतीजा यह होता है कि खाद्य पदार्थों की रिपार्ट आने में छह माह समय लग जाता है। कई बार तो सैंपल की जांच रिपोर्ट एक साल बाद विभाग को मिलती है। जिसके चलते मिलावटखोरों पर भी जल्द कार्रवाई नहीं हो पाती है। विभाग रिपोर्ट के इंतजार में टकटकी लगाकर बैठा रहता है और इस बीच मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री बदस्तूर जारी रहती है।
बीते वर्ष विभाग ने 193 सैंपल एकत्र किए थे। सबसे अधिक सैंपल होली और दीपावली पर लिए गए थे। इनमें केवल 45 की जांच रिपोर्ट विभाग को मिल पाई है। गौर करने वाली बात है कि 45 खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट 11 के सैंपल फेल हुए है। इस साल विभाग ने 75 खाद्य पदार्थों के सैंपल भरे हैं। 50 सैंपल केवल होली के दौरान ही लिए गए। अब एक बार फिर रिपोर्ट आने मिलावटी सामान बिक्री के बाद बाजारों से गायब हो जाएगा।
प्रदेश में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए केवल एक प्रयोगशाला है। लैब और विभाग में संसाधनों का का भी अभाव है। इसके चलते रिपोर्ट मिलने में समय लग जाता है। पिछले साल होली पर लिए गए कई सैंपलों की रिपोर्ट अब विभाग को नहीं मिली है। रिपोर्ट में सैंपल फेल होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
- राजेंद्र सिंह पाल, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी