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ऐतिहासिक दस्तावेज बनेगा ‘कालड़ी से केदार’

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दून यूनिवर्सिटी सभागार में लेखक मुकेश नौटियाल के यात्रा वृतांत 'कालड़ी से केदार' पुस्तक का विमोच?
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देहरादून। वरिष्ठ साहित्यकार मुकेश नौटियाल के यात्रा वृत्तांत ‘कालड़ी से केदार’ का रविवार को प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में विमोचन हुआ। वक्ताओं ने लेखक की कालड़ी से केदार तक की यात्रा को महत्वपूर्ण बताया। कहा, यह यात्रा वृत्तांत एक ऐतिहासिक दस्तावेज बन सकता है।
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रविवार को दून विश्वविद्यालय सभागार में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, कवि एवं समीक्षक असीम शुक्ल, पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी और पद्मश्री बसंती बिष्ट ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य के जन्म स्थान केरल के कालड़ी गांव से उनके निर्वाण स्थल केदारनाथ तक की लेखक की यात्रा अत्यंत जानकारी एवं शोधपरक है। कवि असीम शुक्ल ने कहा कि सामान्य यात्रा वृत्तांत से इतर यहां सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को भी खंगालने का प्रयास किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग की पूर्व निदेशक डॉ. सविता मोहन ने कहा कि यह पुस्तक आदिगुरु शंकराचार्य को एक धर्माचार्य के साथ ही सांस्कृतिक राजदूत के रूप में स्थापित करती है। अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि लेखक ने अपनी यात्रा के दौरान प्रत्येक मिलने वाले से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। देश के दक्षिण छोर का उत्तर भारत से सांस्कृतिक संबंध स्थापित करने वाली यह पुस्तक ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि करती है। वरिष्ठ साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने यात्रा के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर दून विवि के कुलपति प्रो. चंद्रशेखर नौटियाल, कुलसचिव डॉ. मंगल सिंह मंद्रवाल, सूचना आयुक्त जेपी ममगाईं, मदन पंचवाल, डॉ. केदार दत्त पुरोहित, सत्यानंद बडोनी, रामकांत बेंजवाल, नंदकिशोर हटवाल, बीना बेंजवाल आदि मौजूद रहे।
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