24 घंटे सातों दिन काम करेगा आपातकाल के लिए ट्रांजिट हॉस्टल
बिल्डिंग में कार्यालय, राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र, एसईओसी वॉर रूम, फ्यूजन सेंटर, जीआईएस लैब, कांफ्रेंस हॉल, प्रशिक्षण हॉल, मीटिंग हॉल, रिटायरिंग रूम, कैफेटेरिया, संचालन और लॉजिस्टिक टीम के लिए चर्चा कक्ष, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिक एजेंसियों, एनजीओ के लिए चर्चा कक्ष, 24x7 आपातकाल के लिए ट्रांजिट हॉस्टल, अपना सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), एकीकृत भवन प्रबंधन प्रणाली (आईबीएमएस) से सुसज्जित किया जाएगा।
ये भी खास है इस भवन में
- यूएसडीएमए की नई बिल्डिंग का निर्माण 4073.62 वर्ग मीटर भूखंड में किया गया है।
- इसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर सहित छह मंजिलें हैं, जिन्हें ग्रीन बिल्डिंग के तौर पर बनाया गया है।
- डिजाइन को राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (एसआईडीए) ने दी मंजूरी, आईआईटी रुड़की ने किया पास।
- भवन को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि दिन की रोशनी का अधिकतम उपयोग हो सके।
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क्या है कोटि बनाल शैली
उत्तरकाशी के मोरी, बड़कोट, पुरोला और उपला टकनौर क्षेत्र में कोटि बनाल शैली के भवन देखने को मिलते हैं। जो करीब 900 साल पुराने बताए जाते हैं। इन्हें पंचपुरा भवन भी कहा जाता है, जो पहाड़ की आर्थिक समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं। ये भवन स्थापत्य और विज्ञान का शानदार नमूना हैं, जो भूकंप के झटकों को भी आसानी से सह लेते हैं। भूकंपरोधी होने के साथ ही ये भवन ईको फ्रेंडली भी हैं। इन्हीं घरों पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘कोटि बनाल’ ने एशिया के सबसे बड़े ग्रीन फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड हासिल किया है।