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हिंदी हैं हम : कामकाज के साथ हिंदी में रचा साहित्य का संसार, कई गीत, उपन्यास और कविताएं भी लिखी

Tue, 25 Aug 2020 09:42 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
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एमडीडीए वीसी रणवीर चौहान ने हिंदी में कामकाज के साथ साहित्य का संसार भी रचा है। उनकी गिनती ऐसे अधिकारियों में होती है, जो हिंदी में कामकाज को वरीयता देते हैं। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में गीत, उपन्यास और कविताएं भी लिखी हैं। 

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रणवीर चौहान उन अफसरों में शामिल हैं, जिनकी सामान्य बातचीत ज्यादातर हिंदी में होती है। उनका बचपन लखनऊ में बीता है, इसलिए उनकी भाषा में लखनवी अंदाज देखा जा सकता है। इसके अलावा अधिकारियों, कर्मचारियों और आम मिलने वालों से भी वह हिंदी में बात करना पसंद करते हैं।

वह कहते हैं कि हिंदी आम आदमी की भाषा है। उत्तराखंड के सरकारी तंत्र में हिंदी में ही कामकाज होता है। इसलिए उन्हें खुद भी राष्ट्रभाषा और राज्य भाषा में काम करना अच्छा लगता है। उनका उपन्यास 34 लालबाग लखनऊ और काव्य संग्रह कुछ कहना था तुमसे भी हिंदी में ही है। इसके अलावा उन्होंने कई गीत भी लिखे हैं, जिन्हें नए लोगों ने खूब पसंद भी किया है।
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