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Avalanche: हिमालयी राज्यों में हर वर्ष आते हैं 132 हिमस्खलन, सबसे अधिक जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में रिपोर्ट

Tue, 20 Jan 2026 07:44 AM IST
रेनू सकलानी विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक जम्मू-कश्मीर में और उत्तराखंड में हिमस्खलन की घटना रिपोर्ट होती है। सिक्किम में सबसे कम औसतन एक घटना हुई।

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हिमस्खलन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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देश के हिमालयी राज्यों में हर साल औसतन 132 हिमस्खलन की घटना रिपोर्ट हो रही हैं। इनमें सबसे अधिक जम्मू-कश्मीर में रिपोर्ट हो रही हैं, यहीं हिमस्खलन की साइट भी सबसे ज्यादा है। रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) हिमस्खलन को लेकर पूर्वानुमान जारी करता है। इसके लिए जम्मू-कश्मीर, लद्दाख से लेकर अन्य जगहों पर डीजीआरई के सरफेस ऑब्जर्वेटरी (70) और आटोमैटिक वेदर स्टेशन हैं।

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यहां पर मौसम संबंधी जानकारी जुटाने के लिए कर्मियों को भी भेजा जाता है। डीजीआरई के वैज्ञानिक डॉ.सुधांशु शेखर बताते हैं कि जो डेटा मिलता है, उसे चंड़ीगढ़ सेंटर में भेजा जाता है, जहां पर सुपर कंप्यूटर, मॉडल आदि के आधार पर पूर्वानुमान जारी किया जाता है। वे बताते हैं कि वर्ष 2020-21 से 2024-25 की अवधि में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, सिक्किम में करीब 661 घटनाएं (हर साल आते औसतन 132 हिमस्खलन) हुई हैं।

ये वह हैं जो रिपोर्ट हुई हैं, इनकी संख्या अधिक भी हो सकती है। इसमें सबसे अधिक घटनाएं जम्मू-कश्मीर में 500, हिमाचल में 150 रिपोर्ट हुईं। इस अवधि में उत्तराखंड में 10 बड़े हिमस्खलन की जानकारी जुटाई गई। सिक्किम में सबसे कम औसतन एक घटना हुई। नार्थ ईस्ट के अन्य राज्यों में भी हिमस्खलन की घटनाओं का अध्ययन शुरू कर दिया गया है।

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जम्मू-कश्मीर में एक हजार एवलांच साइट

डॉ.शेखर ने बतयाा कि सबसे अधिक हिम्मस्खलन की साइटें जम्मू-कश्मीर में 1000 हैं, जबकि हिमाचल में 200 हैं। उत्तराखंड में 100 चिह्नित की जा चुकी हैं। वे कहते हैं कि हिमस्खलन बढ़ रहे या घट रहे हैं? यह रिपोर्टिंग पर निर्भर करता है। पर यह सही है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अधिक बर्फ गिर रही है, इससे एवलांच का खतरा भी बढ़ गया है।

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