जलस्रोतों और नदियों के उद्गम को जीवित रखने के लिए हिमालयी ताल (झीलें) उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र की ‘वॉटर लाइफ लाइन’ बनेंगे। गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के कई ताल पानी का स्रोत होने के साथ धार्मिक आस्था का केंद्र भी हैं। तालों के जल की स्वच्छता और संरक्षण के लिए भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के जोनल मास्टर प्लान में गाइडलाइन जारी कर दी गई है। इसके साथ ही उत्तराखंड क्लाइमेट चेंज सेंटर ने भी कार्ययोजना तैयार की है।
गढ़वाल हिमालय के कई ताल धार्मिक आस्था का केंद्र तो हैं ही, इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन की वजह से सूख रहे पर्वतीय जलस्रोतों के लिए ये जीवनदाता बन गए हैं। धर्मग्रंथों में डोडी ताल को भगवान गणेश का जन्मस्थान बताया गया है। इसके साथ ही यह हिमालय ट्राउट पक्षी का गढ़ है और समुद्र तल से 3,310 मीटर ऊंचाई पर उत्तर भारत के हाई एल्टीट्यूट का सबसे खूबसूरत ताल है। इसी तरह नचिकेतताल नाग देवता के मंदिर और गोमुख ताल गंगा का उद्गम स्थल हैं। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
गोमुख ताल गढ़वाल हिमालय के सबसे बड़े तालों में शुमार है। यह 27 क्युबिक किमी दायरे में है। समुद्र तल से 4912 मीटर की ऊंचाई पर केदारताल गढ़वाल हिमालय की सबसे ऊंची झील है। भागीरथी की सहयोगी नदी केदारगंगा का उद्गम स्थल है। इसी तरह अन्य तालों से भी कथाएं जुड़ी हुई हैं।
इनके संरक्षण के लिए भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के जोनल मास्टर प्लान में गाइडलाइन जारी की गई है। इसके साथ ही उत्तराखंड क्लाइमेट चेंज सेंटर ने भी तालों के जल की शुद्धता और संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की है। भागीरथी इको सेंसिटिव जोन में कुल 14 ताल हैं।
गाइड लाइन
तालों में घरेलू पानी, म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट की डंपिंग प्रतिबंधित
तालों में आने वाले जलस्रोत पर प्रदूषण बंद किया जाएगा
तालों में आने वाले सिल्ट लोड को रोका जाएगा
तालों की सिल्ट बिना अनुमति नहीं हटाई जाएगी
सिल्ट हटाने के लिए वैज्ञानिक मानकों का पालन होगा
तालों पर पर किसी तरह का बंधा, पुश्ता आदि नहीं बनेगा
प्राकृतिक बंधों को विकसित किया जाएगा
तालों के किनारों पर पत्थर नहीं बिछाए जाएंगे