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साल में एक वर्ग किमी तक सिकुड़ रहे ग्लेशियर

Fri, 06 Nov 2015 10:52 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
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जलवायु परिवर्तन का सीधा असर हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। हिमालयी क्षेत्र के गर्म हो रहे मौसम की वजह से ग्लेशियरों का आकार सिकुड़ता जा रहा है।
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ताजा शोध में उजागर हुआ है कि ग्लेशियर का आकार प्रति वर्ष एक वर्ग किमी सिकुड़ता जा रहा है। विज्ञानियों का कहना है कि 63 हजार साल पहले हिमालयी क्षेत्र में सबसे अधिक ग्लेशियरों की लंबाई बढ़ी थी।

हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर की स्थिति देखने केलिए निकली वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान की टीम ने पाया कि ग्लेशियर समुद्र तल से 3800 मीटर ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। 63 हजार साल पहले इन ग्लेशियर की लंबाई समुद्र तल से 2800 मीटर तक नीचे आ गई थी।
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विज्ञानियों का कहना था कि यह दौर ऐसा था कि हिमालयी क्षेत्र केअलावा विश्व में कई और जगहों पर ग्लेशियरों की लंबाई बढ़ी थी। इसके बाद ग्लेशियरों के आहिस्ता-आहिस्ता पीछे जाने का सिलसिला हो गया। ग्लेशियरों के बढ़ने का सिलसिला जब चरम पर था, तब से अब तक ग्लेशियर एक हजार मीटर पीछे खिसके हैं।

विज्ञानियों की टीम में शामिल वाडिया संस्थान वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि जब ग्लेशियर पीछे खिसके तो उनकी जगह नदियों ने ले ली। ग्लेशियर की बर्फ पिघली तो हिमालयी क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटी-छोटी नदियां पैदा हो गईं।

इसी दौरान श्रीनगर, पीपल घाटी, गोचर, भागीरथी और उत्तरकाशी क्षेत्र में नदियों के किनारे भूमि के कटान से बड़े-बड़े टेरेसेस भी वजूद में आ गए। ग्लेशियर के पीछे खिसकने से जगह निकली तो क्षेत्र के डेमोग्राफी में बदलाव आने लगा। सभ्यता का विकास शुरू हो गया।

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि इस वक्त ग्लेशियर प्रति वर्ष एक वर्ग किमी सिकुड़ रहे हैं। ग्लेशियरों की स्थिति की रिपोर्ट संस्थान ने केंद्र सरकार को भेज दी है।
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