प्रभावित गांव 395
पिछले दस साल में विस्थापित किए गए गांव-2, खर्च करीब 85 लाख
अत्यधिक संवेदनशील गांव जिनका पुनर्वास किया गया-21, खर्च करीब 25 करोड़
2012 से अब तक पुनर्वासित किए गए परिवार- 609, खर्च 17.94 करोड़
पुनर्वास में समस्या
-जमीन की उपलब्धता का न होना
-संसाधनों की कमी, करीब दस हजार करोड़ की जरूरत
आपदाएं राज्यों की सीमाओं को नहीं मानती। यह भी साफ है कि हिमालयी राज्य आपदाओं के मामले में एक जैसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। आपदाओं की संख्या और मारक क्षमता में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में सभी राज्यों के बीच आपदाओं को लेकर सूचनाआें के आदान प्रदान का मजबूत नेटवर्क होना चाहिए। राज्यों को समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण का तंत्र भी विकसित करना होगा।
- पियूष रौतेला, अधिशासी निदेशक, राज्य आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र
पिछले 120 सालों में आए विनाशकारी भूकंप
शिलांग, वर्ष 1887, तीव्रता 8
कांगड़ा, वर्ष 1905, तीव्रता 8.2
बिहार-नेपाल, वर्ष 1934, तीव्रता 8.2
आसाम , वर्ष 1950, तीव्रता 8.6
कश्मीर, वर्ष 2005, तीव्रता 7.6
उत्तरकाशी, वर्ष 1991, तीव्रता 6.7
चमोली, वर्ष 1999, तीव्रता 6.4
ये है उत्तराखंड की ओर से सम्मेलन में रखे जाने वाला कॉमन एजेंडा..
1: राज्य आपदा प्रबंधन बल के लिए सभी राज्यों का बजट बढ़ाया जाए।
2: आपदा पुनर्वास नीति बनाई जाए और इससे संबंधित बजट बढ़ाया जाए।
3: सभी राज्यों के लिए आपदा न्यूनीकरण फंड की व्यवस्था की जाए।
4: भूकंप जोखिम न्यूनीकरण फंड का गठन किया जाए।
5: रिकवरी एवं रिकंस्ट्रशन फंड की व्यवस्था की जाए।
6: आपदा प्रभावितों को बीमा योजनाआें के दायरे में लाया जाए।