इन जगहों को जोखिम के रूप में किया गया है चिह्नित
जोखिम भरे जिलों में चमोली, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग को चिह्नित किया गया है, जबकि इनमें पड़ने वाले जोखिम भरे ब्लॉक में जोशीमठ, भिलंगना, भटवाड़ी, ऊखीमठ, दशोली, देवप्रयाग, जखोली, थराली और नारायणबगड़ शामिल हैं।
18 से 28 डिग्री सतही तापमान वाले क्षेत्रों में फटे 80 फीसदी बादल
आमतौर पर यह समझा जाता है कि जहां बारिश कम होगी, वहां अतिवृष्टि या बादल फटने जैसी घटनाओं की संभावनाएं नहीं होंगी लेकिन अपर गंगा बेसिन में ऐसा नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में कम बारिश वाले क्षेत्रों में धरती के सतही तापमान और टोपोग्राफी एलीवेशन के चलते बनने वाले रीजनल लॉकिंग सिस्टम के कारण बादल फटने और अतिवृष्टि की घटनाएं अधिक होती हैं। शोध में भी यह बात सामने आई है।
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के वैैज्ञानिक डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि शोध के दौरान यह पाया गया कि मानसूनी सीजन में जुलाई और अगस्त माह में धरती के 18 से 28 डिग्री सतही तापमान वाले स्थानों पर 80 प्रतिशत बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जबकि तीन से 17 डिग्री वाले स्थानों पर इन घटनाओं की संख्या 20 प्रतिशत है। जो यह दर्शाता है कि घाटियों में जहां बारिश कम है और सतही तापमान अधिक है, वहां बादल फटने और अतिवृष्टि के लिए अनुकूल सिस्टम निर्मित होता है। वहीं, टोपोग्राफी एलीवेशन की आकृति के चलते भी बादल फटने जैसी घटना के लिए रीजनल लॉकिंग सिस्टम बन जाता है। इसी कारण अपर गंगा बेसिन में पिछले 10 सालों में छह जिलों हुई 57 घटनाएं हुई हैं। इसमें बादल फटने की घटनाएं 29 हैं। इनमें भी सबसे अधिक छह घटनाएं चमोली जिले में दर्ज की गई हैं।
घाटियों में पहाड़ियों के आमने सामने के रिफ्लेक्शन से भी बढ़ता है तापमान
हिमालयी क्षेत्रों में गहराई के साथ अधिक ऊंचाई वाली घाटियों में मानसूनी प्रभाव विभिन्न तरह के होते हैं। इनमें तापमान बढ़ता है तो कई मानसूनी परिवर्तन सामने आने लगते हैं। तथ्यों के अनुसार घाटियों में तापमान अधिक होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका एक प्रमुख कारण रिफलेक्शन भी है। डॉ. पीके मिश्रा ने बताया कि घाटियों में पहाड़ियों की दीवारें एक दूसरे को सामने से रिफलेक्ट करती हैं, जिससे तापमान में वृद्धि होती है। इस बढ़े हुए तापमान का मौसम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई ऐसे हिस्सों में अक्सर दोपहर बाद मौसम खराब हो जाता है। ऐसे में इस तरह की चिह्नित जगहों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।