हिमालय दिवस से निकली आवाज का लिया जाने लगा संज्ञान: डॉ. अनिल जोशी
पर्यावरणविद पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि वर्ष 2010 में स्व. सुंदरलाल बहुगुणा की उपस्थिति में उत्तराखंड और दिल्ली के साथियों की एक बैठक में नौ सितंबर को हिमालय दिवस मनाए जाने की बुनियाद रखी गई थी। उन्होंने कहा कि आज हिमालय दिवस से निकली आवाज का संज्ञान लिया जाने लगा है। हिमालय दिवस की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि इस पर काफी गंभीर मंथन के बाद निर्णय हुआ था कि उत्तराखंड और हिमालय के अन्य भागों में जहां-जहां पर लोग हिमालय बचाने के लिए रचनात्मक कार्यक्रम व आंदोलन चला रहे हैं। वहां पर जाकर उनका सहयोग किया जाए। उनके बारे में लिखा जाए और हिमालय दिवस के दिन इसको उदाहरण बनाकर प्रदर्शित किया जाए। साथ ही रैलियां और सम्मेलन आयोजित किए जाएं। ताकि लोगों की आवाज को सामूहिक ताकत मिले और हिमालय दिवस के माध्यम से सरकार तक जनता की बात को पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसका लाभ होता भी दिख रहा है। हमारी आवाज का नीतिकारों ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि शुरुआत अच्छी हुई, लेकिन हिमालय के प्रति लोगों को अपनी जिम्मेदारी को समझना होगा। हिमालय उत्तराखंड ही नहीं देश की पारिस्थितिकी का भी केंद्र है। आज यूरोप के कई देशों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेंटिग्रेट तक पहुंच गया है। हमारे यहां ऐसी स्थिति न हो, इस पर अभी से विचार करना होगा। जल, जंगल की जो संपदा हमारे पास है उसे संजो कर रखना होगा। उन्होंने कहा कि जब जल, जंगल बने थे तब हम नहीं थे। हमसे कहीं न कहीं प्रकृति के विज्ञान को समझने में चूक हुई है।
ईश्वर ने भी हिमालय को अपना निवास बनाया
डॉ. जोशी ने कहा कि हिमालय आदिकाल से ही देश दुनिया में जाना जाता रहा है। हमारे वेद पुराणों या कोई भी धर्म की पुस्तक हो, उनमें हमेशा से ही हिमालय का किसी न किसी रूप में उल्लेख है। साधु-संतों से लेकर ईश्वर तक ने हमेशा हिमालय को ही अपना निवास बनाया। चाहे भगवान बदरीनाथ हों या अन्य देवी-देवता सबके लिए हिमालय ही एक ऐसी स्थली रही, जो इनको सबसे अधिक प्रिय है।
हिमालय के संरक्षण के लिए जो भी बेहतर होगा, फैसला लेने में पीछे नहीं हटेंगे: सुबोध
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि प्रदेश के विकास और हिमालय के संरक्षण के लिए जो भी बेहतर होगा, हम फैसला लेने में पीछे नहीं हटेंगे। बतौर वन मंत्री वह विभाग में सौ से अधिक बदलाव करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवाद में निकले मुख्य बिंदुओं को सरकार अपनी नीतियों में शामिल करेगी।
बृहस्पतिवार को पटेलनगर स्थित अमर उजाला कार्यालय में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हिमालय का किसी राज्य व देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्व है। इसलिए इसके संरक्षण का दायित्व भी सभी का है। उन्होंने कहा कि हिमालय के बचाव के साथ व्यवहारिकता के पक्ष को भी ध्यान में रखना है। पहले आम आदमी की आजीविका वनों से जुड़ी थी, तब वन सुरक्षित थे। हमें पुन: आम आदमी को वनों से जोड़ना होगा। सरकार इस दिशा में काम कर रही है।
वन मंत्री ने कहा कि हमने इस बार पौधरोपण की नीति में बदलाव किया है। जंगल और इसके आसपास की खाली जमीन पर फलदार पौधे रोपे जा रहे हैं। कोशिश यह है कि छोटे जानवरों को जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल जाए। फिर वह आबादी क्षेत्र में नहीं आएंगे। इससे बड़े जंगली जानवरों का भी आबादी क्षेत्र में आना रुक जाएगा। इसके तहत हम लंबी अवधि की योजना पर काम कर रहे हैं।
वन पंचायतों को बनाएंगे सशक्त
वन मंत्री ने कहा कि सरकार वन पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्हें वनोपज से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए वह 13 सितंबर को एक बैठक आयोजित करने जा रहे हैं।
लैब टू लैंड की पैरवी की, वैज्ञानिक संस्थाओं से मिलकर करेंगे बात
वन मंत्री उनियाल ने लैब टू लैंड की पैरवी की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखने में आता है कि हमारे यहां तमाम वैज्ञानिक संस्थानों में शोध तो होते हैं, लेकिन वह रिजल्ट धरातल पर नहीं पहुंच पाते हैं। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही देहरादून में स्थित पांच वैज्ञानिक संस्थानों के साथ बैठकर इस संबंध में बातचीत करेंगे। ताकि वैज्ञानिकों की लैब में होने वाले शोध के परिणामों को धरातल पर उतारा जा सके। वन मंत्री ने समान प्रवृति के विभागों के एकीकरण की भी पैरवी की।