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उत्तराखंड में टूट रहे ग्लेशियर के पास के पहाड़

Mon, 06 Oct 2014 08:13 AM IST
जीवन दानू/ अमर उजाला, नाचनी (पिथौरागढ़)
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नामिक और हीरामणि ग्लेशियर के पास की पहाड़ी का दरकना जारी है और इन ग्लेशियरों के दक्षिण में स्थित रामगंगा में यह मलबा पटता जा रहा है।
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यह मलबा नदी के किनारे पांच किमी के दायरे में फैल गया है। होकरा और खोयम के पास भी पहाड़ियां टूट रहीं हैं। इतना ही नहीं इस इलाके में निर्माणाधीन सड़कों की वजह से भी भूकटाव हो रहा है।

भूकटाव के कारण जेर्थी गांव को काफी खतरा हो गया है।उल्लेखनीय है कि जून 2013 की आपदा के समय नामिक और हीरामणि ग्लेशियर के पास की एक पहाड़ी दरक गई थी।

तब से उसके टूटने का क्रम जारी है। रामगंगा के किनारे मलबा पटने से लोग इस बात की आशंका जता रहे हैं कि यदि कभी तेज बारिश हुई तो रामगंगा का किनारा तेजी से कटने लगेगा।
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बढ़ रहा है पहाड़ियों के खिसकने का क्रम

मसूरीकांठा से होकरा के लिए बन रही सड़क का मलबा भी नदी में पटता जा रहा है। करीब दस किलोमीटर तक का यह इलाका संवेदनशील स्थिति में आ गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हर साल पहाड़ियों के खिसकने का क्रम बढ़ता जा रहा है। यह पूरा इलाका इतना खतरनाक है कि वहां पर भूकटाव के उपाय करा पाना भी संभव नहीं है।

नीचे से नदी पहाड़ों को काटती है और ऊपर से कमजोर पहाड़ियों का मलबा लगातार नदी में पटता रहता है। इससे जेर्थी गांव के 22 परिवार खतरे में हैं।

प्रशासन ने इस गांव को रहने के लिए खतरनाक मानते हुए परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की सिफारिश की है।

जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने कहा है कि नामिक और हीरामणि ग्लेशियर के दक्षिणी ढलान में बसा पूरा क्षेत्र स्लाइड जोन घोषित है। इस स्थान पर भूकटाव रोकने के लिए कोई उपाय नहीं है।
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पूरा क्षेत्र स्लाइड जोन घोषित : डीएम

एचसी सेमवाल ने कहा कि भूवैज्ञानिकों की टीम इस इलाके का दौरा कर चुकी है। यहां पर कमजोर चट्टान लगातार खिसकती रहती है। प्रशासन लोगों के जानमाल की सुरक्षा के लिए कदम उठाएगा जो परिवार खतरे में हैं उनको सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाएगा।

घुलनशील, कमजोर सिस्टों के बनी हैं ये पहाड़ियां
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी डा. आरएस राना का कहना है कि भूस्खलन वाला यह पूरा क्षेत्र मुनस्यारी थ्रस्ट के नाम से चिन्हित है। यह क्षेत्र उत्तरकाशी से नेपाल तक (मध्यहिमालय) फैला है।

यहां की पहाड़ियां माइकेशिएस, सेरीसाइटिक और नाइटेट आदि कमजोर सिस्टों से बनीं हैं, जो अत्यधिक घुलनशील है। यही वजह है कि बारिश होने पर ये सिस्ट गल जाते हैं और यह जमीन के ऊपरी सतह में एक मीटर से लेकर 10 मीटर तक दरकती जाती हैं।

नदी नालों के कटाव से इन पहाड़ियों के दरकने की गति बढ़ जाती है। इसके बाद जो जमीन होती है वह मजबूत होती है। यह भूकंप की दृष्टि से भी जोन नंबर 5 में आता है।
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