नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से शहर में रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए लागू की जा रही वेंडिंग व्यवस्था को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सही ठहराया है। रेहड़ी-पटरी कमजोर वर्ग कल्याण समिति मसूरी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पालिका की ओर से की गई कार्यवाहियों को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पालिका प्रशासन ने इसे अपनी पारदर्शी और नियमों के तहत की गई कार्रवाई की पुष्टि बताया है।
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि रेहड़ी-पटरी कमजोर वर्ग कल्याण समिति की ओर से हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर की गई थी। याचिका में टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के गठन, नए सिरे से सर्वे कराने और माल रोड पर फड़-फेरी लगाने की अनुमति देने सहित कई मांगें रखी गई थीं। सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद मसूरी की ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष पालिका द्वारा की गई पूरी प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होने बताया कि न्यायालय ने पालिका की ओर से प्रस्तुत तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए माना कि याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाई गई शिकायतों का नियमानुसार समाधान किया जा चुका है। इसके बाद न्यायालय ने मामले को निस्तारित कर दिया।
अधिशासी अधिकारी ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्णय के बाद साफ हो गया है कि पालिका प्रशासन शहर की यातायात व्यवस्था, पर्यटकों की सुविधा, माल रोड की सुंदरता और पटरी व्यवसायियों के हितों के बीच संतुलन बनाकर कार्य कर रहा है। उन्होंने सभी लाइसेंस धारक वेंडरों से अपील की कि वे निर्धारित वेंडिंग जोन में ही अपना व्यवसाय संचालित करें और मसूरी को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखने में सहयोग करें।