हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य के पदों पर चल रही पदोन्नति प्रक्रिया पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हेमंत कुमार ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश में राज्य सरकार की ओर से प्रधानाचार्य के पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह असंवैधानिक तरीके से की जा रही है।
जो अध्यापक एलटी ग्रेड से प्रवक्ता के पद पर पूर्व में ही पदोन्नत हो चुके हैं, उनको नियम विरुद्ध तरीके से एलटी ग्रेड का टीचर मानते हुए प्रधानाध्यापक के पद पर प्रमोशन के लिए उपयुक्त करार दिया गया है। ये अध्यापक पूर्व में ही प्रवक्ता के पद पर पदोन्नति पा चुके हैं और उन्हें एलटी ग्रेड के 55 प्रतिशत कोटे का लाभ भी दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इन प्रवक्ताओं को 55 प्रतिशत कोटे के अंदर नहीं रखा जाए। याचिका में कहा गया कि प्रवक्ता पद पर पदोन्नति होने के बाद भी ये अध्यापक बहुत कनिष्ठ हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अग्रिम आदेश तक प्रधानाचार्य के पदों की पदोन्नति पर रोक लगा दी।