पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवासीय सुविधा देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। बुधवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को तीन सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को खुद ही आवास खाली कर नजीर पेश करनी चाहिए थी।
नैनीताल हाईकोर्ट
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कुछ समय पहले ही रूलक (रूरल लिटिगेशन एंड एन्टाइटिलमेंट सेंटर) ने प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जा रही आवासीय सुविधा के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी।
नैनीताल उच्च न्यायालय
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रूलक का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जा रही सुविधाएं पूरी तरह से गलत हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कई सालों से इन आवासों में रह रहे हैं। इन आवासों को खाली भी नहीं किया जा रहा है और इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी का सरकारी आवास
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याचिका में यह भी कहा गया कि जितने समय तक पूर्व मुख्यमंत्रियों ने इन आवासीय सुविधाओं का उपयोग किया गया है, उनसे उस अवधि का किराया भी वसूल किया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश वीके बिष्ट और न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ की सख्त टिप्पणी थी कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को खुद ही आवास खाली कर नजीर पेश करनी चाहिये थी।
रमेश पोखरियाल निशंक का सरकारी आवास
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उत्तर प्रदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास खाली करने का फैसला सुनाया था। खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूरी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा को नोटिस जारी किया है।
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विजय बहुगुणा
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पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी इस समय नैनीताल लोकसभा सीट से और रमेश पोखरियाल निशंक हरिद्वार से सांसद हैं। कोश्यारी को देहरादून में हाथी बड़कला में, निशंक और भुवन चंद्र खंडूड़ी को यमुना कॉलोनी में आवास आवंटित है। विजय बहुगुणा को बीजापुर में और पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को एफआरआई देहरादून में सरकारी आवास उपलब्ध है।