2013 में केदारनाथ में आई आपदा के दौरान तीर्थयात्रियों की मौत और उनके शवों की डीएनए जांच कराने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वह वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून को भी पक्षकार बनाए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि केदारनाथ में 2013 में आई दैवीय आपदा के बाद केदारघाटी में करीब 4200 लोग लापता हो गए थे। छह वर्ष बाद भी 3200 लोगों के शव केदारघाटी में दफन हैं, जिन्हें निकालने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्व में भी हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि केदारनाथ घाटी से शवों को निकाल कर उनका अंतिम संस्कार करवाए लेकिन सरकार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता का कहना है कि अब भी केदारघाटी में शव निकल रहे हैं। शवों को खोजकर उनका अंतिम संस्कार करवाया जाए। डीएनए जांच कराकर शवों को परिजनों को सौंपा जाए।
याचिका में कहा गया कि सरकार के पास अब तक 900 से अधिक लोग अपने परिजनों के शवों लेने को पहुंचे हैं जो उनका डीएनए जांच कराने के लिए भी तैयार हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इसके लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए जो सर्वे करे और बताए कि शव कहां-कहां दफन है और उन्हें कैसे निकाला जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को वाडिया इंस्टीट्यूट के लिए सुझाव दिया गया था। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को आदेश दिए हैं कि वह इसमें वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून को भी पक्षकार बनाए।