वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति अलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सुशील उर्फ भूरा और मेहताब ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट देहरादून के 27 जनवरी 2014 के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें अभियुक्तों को गैंगरेप कर हत्या करने के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
बता दें कि विकास नगर निवासी व्यक्ति ने 29 दिसंबर 2012 को विकास नगर थाने में एफआईआर दर्ज कर कहा था कि उसकी 55 वर्षीय मां बकरियों को चराने के लिए जंगल गई थी, लेकिन वह वापस नहीं आई।
उनकी काफी खोजबीन करने पर उनका शव जंगल में मिला और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ था। इस प्रकरण पर स्पेशल जज देहरादून ने 27 जनवरी 2014 को आईपीसी की धारा 302 व 376 जी के तहत निर्मम हत्या करने व दुष्कर्म करने के आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी। इसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।