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उत्तराखंड में खत्म होगी 157 साल पुरानी व्यवस्था, हाईकोर्ट ने सरकार को छह महीने का दिया समय

Sat, 13 Jan 2018 12:46 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
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हाइकोर्ट ने उत्तराखंड में करीब 157 साल पुरानी व्यवस्था को खत्म करने के लिए आदेश जारी किया है। इसके लिए सरकार के पास छह माह का समय है। कोर्ट ने राजस्व पुलिस व्यवस्था को छह माह के भीतर समाप्त कर अपराध विवेचना का काम  सिविल पुलिस को सौंपे जाने के निर्देश दिए हैं।

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कोर्ट ने इस अवधि में राज्य में थानों की संख्या बढ़ाने तथा आवश्यक सुविधाएं जुटाने के लिए भी कहा है। वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने उक्त निर्देश देते हुए टिहरी गढ़वाल में सन 2011 में हुए दहेज हत्याकांड से संबंधित विशेष अपील निस्तारित करते हुए सजायाफ्ता अभियुक्त सुंदर लाल की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।   

हाइकोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखने के साथ ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में राजस्व पुलिस का काम देख रहे पटवारियों के पुलिस अधिकार खत्म करने के आदेश दिए।
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कोर्ट ने राज्य सरकार को छह माह का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में राज्य सरकार पटवारी क्षेत्रों में रेगुलर पुलिस की व्यवस्था करे। इस अवधि के बाद राजस्व पुलिस में कोई भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाएगी, न ही राजस्व पुलिस द्वारा संबंधित मामले की जांच की जाएगी।

कोर्ट का कहना है कि राज्य की आबादी एक करोड़ से अधिक है और राज्य में मात्र 156 थाने हैं इस प्रकार लगभग 64 हजार लोगों पर मात्र एक थाना है। कोर्ट ने सरकार को छह माह के भीतर थानों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि अपराधों पर नियंत्रण हो सके।

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यह कहना है कोर्ट का

कोर्ट ने कहा कि एक सर्किल में दो पुलिस स्टेशन होने चाहिए और थाने का संचालन कम से कम सब इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने 2004 के नवीन चंद्र बनाम राज्य सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इनमें भी इस प्रथा की समाप्ति की आवश्यकता जताई गई थी।

कोर्ट ने कहा कि पटवारियों तथा राजस्व अधिकारियों की ट्रेनिंग पुलिस की तर्ज पर नहीं होती, जिससे वे अपराध स्थल से अपराध की सही विवेचना कर सकें। इसके अलावा उनके पास विवेचना के लिए आधुनिक साधन, कंप्यूटर, डीएनए व रक्त परीक्षण, फॉरेंसिक जांच की व्यवस्था, फिंगर प्रिंट लेने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं जिससे अपराध की समीक्षा में परेशानी होती है और इसका लाभ अपराधियों को मिलता है।

कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि प्रदेश के चार जिलों में तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी सिविल पुलिस व्यवस्था है जबकि शेष में राजस्व पुलिस व्यवस्था है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में सर्वत्र एक समान पुलिस व्यवस्था नागरिकों का अधिकार है जो उन्हें मिलना चाहिए।

दहेजहत्या के मामले में सुनाई गई थी सजा
टिहरी गढ़वाल के गांव गवाना पट्टी डागर निवासी बचन दास ने 23 दिसंबर 2011 को राजस्व पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें कहा था कि ससुरालियों ने उसकी बेटी रामेश्वरी को दहेज के लिए उत्पीड़न कर मार डाला है। 21 दिसंबर 2012 को इस मामले में निचली कोर्ट ने अभियुक्त सुंदर लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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