कोर्ट ने कहा कि एक सर्किल में दो पुलिस स्टेशन होने चाहिए और थाने का संचालन कम से कम सब इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए। कोर्ट ने 2004 के नवीन चंद्र बनाम राज्य सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इनमें भी इस प्रथा की समाप्ति की आवश्यकता जताई गई थी।
कोर्ट ने कहा कि पटवारियों तथा राजस्व अधिकारियों की ट्रेनिंग पुलिस की तर्ज पर नहीं होती, जिससे वे अपराध स्थल से अपराध की सही विवेचना कर सकें। इसके अलावा उनके पास विवेचना के लिए आधुनिक साधन, कंप्यूटर, डीएनए व रक्त परीक्षण, फॉरेंसिक जांच की व्यवस्था, फिंगर प्रिंट लेने जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं जिससे अपराध की समीक्षा में परेशानी होती है और इसका लाभ अपराधियों को मिलता है।
कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि प्रदेश के चार जिलों में तो दूरस्थ क्षेत्रों में भी सिविल पुलिस व्यवस्था है जबकि शेष में राजस्व पुलिस व्यवस्था है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में सर्वत्र एक समान पुलिस व्यवस्था नागरिकों का अधिकार है जो उन्हें मिलना चाहिए।
दहेजहत्या के मामले में सुनाई गई थी सजा
टिहरी गढ़वाल के गांव गवाना पट्टी डागर निवासी बचन दास ने 23 दिसंबर 2011 को राजस्व पुलिस में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें कहा था कि ससुरालियों ने उसकी बेटी रामेश्वरी को दहेज के लिए उत्पीड़न कर मार डाला है। 21 दिसंबर 2012 को इस मामले में निचली कोर्ट ने अभियुक्त सुंदर लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।