याची का कहना था कि प्रदेश के हजारों अनुसूचित जाति / जनजाति के छात्रों को केंद्र सरकार छात्रवृत्ति देती है। समाज कल्याण विभाग ने यह छात्रवृत्ति न बांटकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। इसमें 500 करोड़ से अधिक का घपला हुआ है। इस घपले के तार राज्य से बाहर भी जुड़े हैं।
इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाय। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 में एसआईटी से जांच कराई थी। दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गयी। सरकार का कहना था कि एक दिसंबर 2018 को एसआईटी ने सिडकुल हरिद्वार थाने में देहरादून व हरिद्वार जिले में हुए घपले के संबंध में आईपीसी की धारा 420 का मुकदमा दर्ज कराया।
कोर्ट ने पूर्व में मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया था और एसआईटी के अध्यक्ष डाक्टर के मंजूनाथ और अपर सचिव रणवीर सिंह को दस्ती नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने पूर्व में जांच कर रहे अपर सचिव समाज कल्याण को हटाये जाने का भी संज्ञान लिया था। कोर्ट ने माना है कि जनता के पैसों का दुरुपयोग हुआ है।