नैनीताल हाईकोर्ट ने डेंगू और चिकनगुनिया से पीड़ित लोगों को राहत दिलाने के लिए कोई ठोस कदम न उठाने के मामले को गंभीरता से लिया है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को एक माह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी अधिवक्ता रोहित ध्यानी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देहरादून और प्रदेश के अन्य हिस्सों में गंदगी से पैदा होने वाले मच्छर और उनके काटने से फैल रहे डेंगू की रोकथाम के लिए सरकार ने कोई उचित कदम नहीं उठाया है।
याचिका में कहा गया है कि मच्छर कहां-कहां हो रहे हैं, उन्हें कैसे समाप्त किया जाए, इसके लिए सरकार की ओर से कोई नीति नहीं बनाई गई। नगर निगम की ओर से फॉगिंग नहीं की जाती है। नगर निगम केवल मिट्टी के तेल का छिड़काव करता है। इससे मच्छर मरते नहीं, उड़ जाते हैं। डेंगू और अन्य मच्छरों को मारने के लिए एडल्टीसाइड की जरूरत होती है। इसका इस्तेमाल नगर निगम नहीं कर रहा है।
याचिका में कहा गया कि हर वर्ष मानसून के समय बीमारी होती ही है। इस बीमारी का मुख्य कारण शहर में फैली गंदगी, ठहरा हुआ पानी होता है। इससे निपटने के लिए सरकार की ओर से कोई कार्य नहीं किया जाता है। जब यह रोग फैल जाता है तो इसे रोकने के लिए आवश्यक उपाय नहीं होते हैं। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को एक माह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।