हल्द्वानी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना में हो रही देरी के मामले में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित आदेश के क्रम में निदेशक शहरी विकास डीएस गर्ब्याल शुक्रवार को कोर्ट में पेश हुए।
कोर्ट ने पूछा कि उत्तराखंड में प्लास्टिक और पॉलिथीन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित क्यों नहीं हुआ और इस संबंध में शासन स्तर पर क्या कार्यवाही की गई। कोर्ट ने इस संबंध में ठोस कदम उठाने के साथ ही लोगों व स्कूली बच्चों को पॉलिथीन के उपयोग से होने वाली बीमारियों और जानवरों को होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने उनसे इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द बनवाने को कहा।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की खंडपीठ के समक्ष शुक्रवार को मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी पूरन चंद्र जोशी व अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हल्द्वानी में बन रही सॉलिड वेस्ट परियोजना में देरी हो रही है, जिसके कारण केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2017 के बाद धनराशि और परियोजना को बंद करने की चेतावनी दी है।
प्रोजेक्ट का संचालन कर रही एक्जक्यूटिव कमेटी ने पूर्व में हाईकोर्ट में उपस्थित होकर बताया था कि प्रोजेक्ट को बनाने के लिए उनकी तरफ से किसी भी प्रकार की देरी नहीं हो रही है। उन्होंने इसके लिए उपकरण खरीद कर टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर ली है, लेकिन इसका अनुमोदन आयुक्त कुमाऊं द्वारा नहीं किया जा रहा है।
याचिका में कहा कि वर्ष 2013 में हल्द्वानी के साथ रुद्रपुर, रामनगर, भीमताल और भवाली के कूड़ा निस्तारण के लिए केंद्र सरकार ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की मंजूरी दी थी। साथ ही 2013 में इस प्रोजेक्ट को लगाने के लिए 1395 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जिसकी पहली किस्त की धनराशि सरकार को अवमुक्त कर दी गई, लेकिन सरकार व स्थानीय निकायों ने इस धनराशि का उपयोग नहीं किया गया और न ही शासन स्तर पर प्लांट लगाने हेतु कोई कार्यवाही की गई।
नवंबर 2016 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से पत्र के माध्यम से पूछा था कि अभी तक जो प्रोजेक्ट लगाने के लिए पहली किस्त की धनराशि केंद्र ने भेजी थी, उसका उपयोग हुआ या नहीं। इसका उपयोग प्रमाण पत्र 31 मार्च 2017 तक केंद्र को उपलब्ध कराए, यदि नहीं हुआ है तो प्रोजेक्ट को बंद किया जाए।
इस संबंध में शुक्रवार को शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उनसे कई सवाल पूछते हुए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को जल्द बनवाने के लिए कहा है। कोर्ट ने लोगों और स्कूली बच्चों को पॉलिथीन के उपयोग से होने वाली बीमारियों और नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए भी कहा और इस संबंध में निर्णय सुरक्षित रख लिया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूर्ण रूप से न किए जाने के कारण स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि निचले स्थानों पर रहने वाले नागरिकों को प्रदूषित पानी का प्रयोग करना पड़ रहा है, जिसके कारण गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं और प्लास्टिक का प्रयोग लगातार होने के कारण न केवल मानव, बल्कि जानवरों पर भी इसका कुप्रभाव देखने को मिल रहा है।
हाईकोर्ट के सवालों पर गर्ब्याल का जवाब
प्रदेश में अलग-अलग स्तर पर निगम इत्यादि कार्य कर रहे हैं एवं ग्रामीण क्षेत्र उनके प्रबंधन में नहीं आता है, जिससे के उक्त स्थानों पर पूर्ण रूप से प्लास्टिक का प्रयोग प्रतिबंधित नहीं हो पा रहा है। हाईकोर्ट ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए आदेशित किया कि प्रदेश में प्लास्टिक प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए समुचित उपाय व आदेश जारी करें।