तीन हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंगलवार यानी 10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब के कपाट बंद कर दिए गए। सिखों के पवित्र धाम के कपाट विधि विधान के साथ दोहपर डेढ़ बजे बंद किए गए। पंच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रन्थ साहिब को सतखंड में रखा गया।
साथ ही लक्ष्मण लोकपाल मंदिर के कपाट भी हुए बंद किए गए। सोमवार को दिल्ली से जनक सिंह और चमनजीत सिंह के नेतृत्व में करीब तीन हजार सिख श्रद्धालुओं का जत्था रात्रि विश्राम के लिए घांघरिया पहुंच गया था।
गोविंदघाट गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि कपाट बंद करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंगलवार को सुबह दस बजे सुखमणी पाठ, सुबह ग्यारह बजे सबद-कीर्तन, दोपहर साढ़े बारह बजे अरदास के बाद विधि विधान के साथ गुरु ग्रंथ साहिब को पंच प्यारों की अगुवाई में सतखंड में विराजमान किया गया और दोपहर डेढ़ बजे धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
कपाट बंद होने की प्रक्रियाएं मुख्य ग्रंथी मिलाप सिंह और कुलवंत सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस वर्ष हेमकुंड साहिब में तीर्थयात्रियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। इस वर्ष दो लाख 27 हजार तीर्थयात्रियों ने हेमकुंड साहिब के दर्शन किए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या एक लाख 80 हजार थी।