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उत्तराखंड में बारिश से तबाही: देहरादून में 7 लोगों की मौत, पिथौरागढ़ में पुल बहा

Wed, 11 Jul 2018 09:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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रामगंगा में बाढ़ से बह गया पुल
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उत्तराखंड में बुधवार को भारी बारिश ने जमकर तबाही मचाई। अकेले राजधानी देहरादून में अलग-अलग घटनाओं में सात लोगों की मौत हो गई। वसंत विहार क्षेत्र में मकान का पुश्ता ढ़हने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई और दो घायल हो गए। रिस्पना नदी का जलस्तर बढ़ने से दो लोग बह गए, जिनके शव कुछ ही दूरी पर बरामद किए गए। वहीं, सहसपुर क्षेत्र में भी पानी के बहाव में एक व्यक्ति बह गया, जिसकी मौत हो गई। 

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राजधानी देहरादून और आस-पास के क्षेत्रों में मंगलवार आधी रात के बाद तेज बारिश शुरू हो गई। विशेषकर मसूरी और उससे लगे इलाकों में बहुत भारी बारिश हुई, जिससे रिस्पना और बिंदाल नदियों का जलस्तर भी बढ़ गया। कई जगह लोगों के घरों में पानी भरने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसके अलावा शहर में अलग-अलग स्थानों पर पानी भरने से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

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वसंत विहार के शास्त्री नगर खाला में मकान का पुश्ता ढ़हने से संतोष साहनी (35), सुलेखा देवी (30), धीरज कुमार (05) और नीरज कुमार (03) की मौत हो गई। वहीं, प्रमोद साहनी (35) और जगदीश साहनी (70) को घायल अवस्था में दून अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, बलवीर रोड निवासी राजेश सुबह रिस्पना नदी के तेज बहाव में बह गया। कुछ देर बाद राजेश का शव मोथरोवाला क्षेत्र में दौड़वाला के पास मिला। रायपुर क्षेत्र में भी एमडीडीए कॉलोनी निवासी नफीस (50) भी रिस्पना नदीं में बह गया, जिसका शव क्लेमेंटटाउन क्षेत्र से लगे दूधली में मिला। सहसपुर में शीतला नदी के रपटे में अब्दुल अजीज (65) बह गया, कुछ ही दूरी पर पुलिस ने उसका शव बरामद कर लिया। 

मौसम विभाग के अनुसार बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक मसूरी क्षेत्र में 192.3, सर्वे चौक (देहरादून) में 112, कपकोट (बागेश्वर) में 110, धारचूला में 69, टिहरी में 60.8 और मुनस्यारी में 57 मिमी बारिश हुई। हालांकि प्रदेश के कई अन्य इलाकों में बहुत कम बारिश हुई। प्रदेश में औसतन 16.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग ने आज भी कुमाऊं के लगभग सभी और गढ़वाल के चार जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम केंद्र प्रभारी बिक्रम सिंह ने बताया कि आज भी पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। भारी बारिश के अनुमान को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है।

मूसलाधार बारिश से रिस्पना नदी का जल स्तर बढ़ा

रिस्पना नदी में बढ़ गया पानी
वहीं देहरादून जिले में भण्डाल गांव कुठाल गेट के पास खाले में मालबा और पानी आ जाने से कुछ लोग फंस गए, जिन्हें रेस्क्यू करने के लिए टीम रवाना हुई। त्यागी रोड पर रेलवे लाइन के पास एक पेड़ गिर गया। जिससे आवाजाही प्रभावित हुई। मंगलवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश से रिस्पना नदी का जल स्तर भी बढ़ गया है।

जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने 11 जुलाई 2018 को तेज आंधी और बरसात को देखते हुए जनपद में स्थित समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों और कक्षा एक से कक्षा 12 तक के समस्त स्कूलों का अवकाश घोषित किया है। वहीं राजधानी के एशियन स्कूल की दीवार भी ढह गई है। देहरादून में बिंदाल पुल पर मौजूद एक हाई वोल्टेज टावर गिर गया, जिससे दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए।

मसूरी में बरसी आफत की बारिश, 10 घंटे रहा मसूरी-नैनबाग हाईवे बंद
मसूरी व आस पास के क्षेत्र में विगत दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त है। बारिश के चलते मसूरी कैम्पटी नैनबाग हाईवे पर कैम्पटी फाल से आगे कांडीखाल के समीप भारी भूस्खलन से होने से मुख्य मार्ग करीब 10 घंटे अवरुद्ध रहा । जिससे यमुनोत्री यात्रा में जाने वाले यात्रियों समेत स्थानीय लोगों को जाम में फंसे रहना पड़ा। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना सुबह ग्रामीण क्षेत्र से मसूरी व देहरादून जाने वाले दूध और सब्जी के वाहनों को उठाना पड़ा। घंटों जाम में फंसे रहने के कारण समय से दूध-सब्जी मसूरी व देहरादून नहीं पहुंच पाई। लगातार पहाड़ी से गिरते मलबे के कारण जेसीबी को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और दस घंटे बाद मार्ग यातायात के लिए सुचारू किया गया।

मसूरी देहरादून रोड पर किंग्रेग पेट्रोल पंप के पास नेपाली बस्ती में रह रहे 18 परिवार पर बारिश आफत बनकर बरसी। भूस्खलन की जद में आई इस बस्ती के करीब आधा दर्जन घर आंशिक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लगातार बारिश होने से बाकि घरों पर भी खतरा बना हुआ है। भूस्खलन की सूचना मिलते ही मसूरी एसडीएम मीनाक्षी पटवाल और अधिशासी अधिकारी एमएल शाह टीम के साथ मौके पर पहुंचे और परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करवाया। 


 
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नाचनी में बहा झूला पुल

उफान पर रामगंगा
पिथौरागढ़ में मूसलाधार बारिश ने काफी तबाही मचाई है। यहां रामगंगा के उफान पर होने के कारण नाचनी में झूला पुल बह गया। यह पुल नाचनी और बागेश्वर को जोड़ता है। राम गंगा का रौद्र रूप देखकर लोगों में दहशत है। रात से लोग डरे-सहमे हैं। वहीं भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए डीएम विनोद कुमार सुमन ने 12 जुलाई को नैनीताल के सभी स्कूलों में छुट्टी के दिए आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा कि छुट्टी के बावजूद स्कूल खोले जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बागेश्वर और पिथौरागढ़ की सीमा पर स्थित नाचनी झूला पुल टूटने से कपकोट विकासखंड के केंचुआ काला बेर कपड़े ग्राम सभा का दुनिया से संपर्क टूट चुका है।  ग्रामीण गांव में कैद होकर रह गए हैं। ग्राम सभाओं के 3 दर्जन से अधिक छात्र नाचनी में पढ़ते हैं। पुल टूटने से पढ़ाई की समस्या पैदा हो गई है। अब बच्चों को 7 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर नाचनी कॉलेज तक पहुंचना होगा।  इधर पूर्वी रामगंगा में आई बाढ़ से आसपास के सैकड़ों नाली खेत बर्बाद हो गए हैं। खासकर भगोना ग्राम सभा में 25 नाली खेतों पर भारी मलबा जमा हो गया है।

नदी के तेज बहाव में यहां एक जेसीबी और दो कारें बह गई हैं। नाचनी में बिजली के कई पोल बह गए हैं, जिस कारण नाचनी, मुनस्यारी और मदकोट में बिजली गुल है। झूलाघाट में भी महाकाली उफान पर है। नदी अपने साथ टीन गरडर बहा कर लाई। जिससे नदी पर बने पुल पर खतरा मंडरा रहा है। बागेश्वर के कपकोट में सरयू नदी का पानी काफी बढ़ गया है। यहां भी नदी में कई वाहन बह गए हैं। अगर बारिश इसी तरह जारी रही तो तबाही और ज्यादा बड़ सकती है। उधर, गढ़वाल में बारिश से यमुनोत्री हाईवे डबरकोट और यमुनापुल के पास बंद पड़ा है। मार्ग खोलने के प्रयास जारी हैं।

कैलाश यात्रियों की भी रोकी राह : तीसरे और सातवें दल के कैलाश यात्री बुधवार को भी हेलीकॉप्टरों के उड़ने का इंतजार करते रहे। पिछले पांच दिन से दोनों दलों के यात्री पिथौरागढ़ पर्यटक आवास गृह में ही रुके हैं। तीसरा दल कैलाश परिक्रमा कर लौट आया है जबकि सातवें दल के यात्रियों को आगे जाना है। इधर 58 सदस्यीय आठवें दल के यात्रियों को भी अल्मोड़ा में ही रोक लिया गया है। अगले आदेश के बाद ही इस दल को आगे रवाना किया जाएगा।

कैलाश मार्ग हुआ खतरनाक : धारचूला से 53 किमी दूर लखनपुर से 22 किमी दूर लामारी चट्टान बुरी तरह दरकी है। लोग रस्सियां लगाकर आवाजाही कर रहे हैं, इसमें खतरा बना है। डीएम सी. रविशंकर ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के लखनपुर से लामारी तक 22 किमी के हिस्से में आवागमन पर रोक लगा दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति आवाजाही करता है तो इसके लिए वह स्वयं ही जिम्मेदार रहेगा।
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